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Rigveda Mandal 7 / Sukta 34 / Mantra 23

104 Sukta
25 Mantra
7/34/23
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- आर्षीत्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
तन्नो॒ रायः॒ पर्व॑ता॒स्तन्न॒ आप॒स्तद्रा॑ति॒षाच॒ ओष॑धीरु॒त द्यौः। वन॒स्पति॑भिः पृथि॒वी स॒जोषा॑ उ॒भे रोद॑सी॒ परि॑ पासतो नः ॥२३॥

तत् । नः॒ । रायः॑ । पर्व॑ताः । तत् । नः॒ । आपः॑ । तत् । रा॒ति॒ऽसाचः॑ । ओष॑धीः । उ॒त । द्यौः । वन॒स्पति॑ऽभिः । पृ॒थि॒वी । स॒ऽजोषाः॑ । उ॒भे इति॑ । रोद॑सी॒ इति॑ । परि॑ । पा॒स॒तः॒ । नः॒ ॥

Mantra without Swara
तन्नो रायः पर्वतास्तन्न आपस्तद्रातिषाच ओषधीरुत द्यौः। वनस्पतिभिः पृथिवी सजोषा उभे रोदसी परि पासतो नः ॥

तत्। नः। रायः। पर्वताः। तत्। नः। आपः। तत्। रातिऽसाचः। ओषधीः। उत। द्यौः। वनस्पतिऽभिः। पृथिवी। सऽजोषाः। उभे इति। रोदसी इति। परि। पासतः। नः ॥२३॥

Ashtak » 5 Adhyay » 3 Varga » 27 Mantra » 3

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Meaning
हे विद्वानो ! जैसे (पर्वताः) मेघ वा शैल (नः) हमारे लिये (तत्) उन (रायः) धनों को (रातिषाचः) जो दान का सम्बन्ध करते हैं वा (आपः) जलों को वा हमारे (तत्) उन (ओषधीः) यवादि ओषधियों को वा (तत्) उन अन्य पदार्थों को (उत) निश्चय करके (सजोषाः) समान सेवनेवाला जन वा (द्यौः) सूर्य (वनस्पतिभिः) वटादिकों के साथ (पृथिवी) पृथिवी वा (उभे) दोनों (रोदसी) प्रकाश और पृथिवी भी (नः) हम लोगों की (परि, पासतः) रक्षा करें, वैसे हम लोगों की आप लोग रक्षा करें ॥२३॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है । पढ़ने और सुननेवाले जन पढ़ाने और उपदेश करानेवालों के प्रति ऐसी प्रार्थना करें, हम लोगों को आप ऐसा बोध करावें कि जिससे हम लोग सब सृष्टि के सकाश से सुख की उन्नति कर सकें ॥२३॥
Subject
फिर विद्वान् जन अन्यों को क्या-क्या ज्ञान देवें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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