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Rigveda Mandal 7 / Sukta 34 / Mantra 2

104 Sukta
25 Mantra
7/34/2
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- भुरिगार्चीगायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
वि॒दुः पृ॑थि॒व्या दि॒वो ज॒नित्रं॑ शृ॒ण्वन्त्यापो॒ अध॒ क्षर॑न्तीः ॥२॥

वि॒दुः । पृ॒थि॒व्याः । दि॒वः । ज॒नित्र॑म् । शृ॒ण्वन्ति॑ । आपः॑ । अध॑ । क्षर॑न्तीः ॥

Mantra without Swara
विदुः पृथिव्या दिवो जनित्रं शृण्वन्त्यापो अध क्षरन्तीः ॥

विदुः। पृथिव्याः। दिवः। जनित्रम्। शृण्वन्ति। आपः। अध। क्षरन्तीः ॥२॥

Ashtak » 5 Adhyay » 3 Varga » 25 Mantra » 2

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Meaning
जो कन्या (अधः, क्षरन्तीः) नीचे को गिरते वर्षते हुए जलों के समान विद्या (शृण्वन्ति) सुनती हैं वे (पृथिव्याः) पृथिवी और (दिवः) सूर्य के (जनित्रम्) कारण को (विदुः) जानें ॥२॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे मेघमण्डल से जल वेग से पृथिवी को पाकर प्रजा आनन्दित होते हैं, वैसे जो कन्या पढ़ानेवाली से भूगर्भादि विद्या को पाकर पति आदि को निरन्तर सुख देती हैं, वे अत्यन्त श्रेष्ठ होती हैं ॥२॥
Subject
फिर वे कन्या किस-किस विद्या को जानें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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