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Rigveda Mandal 7 / Sukta 34 / Mantra 12

104 Sukta
25 Mantra
7/34/12
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- भुरिगार्चीगायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अवि॑ष्टो अ॒स्मान्विश्वा॑सु वि॒क्ष्वद्युं॑ कृणोत॒ शंसं॑ निनि॒त्सोः ॥१२॥

अवि॑ष्टो॒ इति॑ । अ॒स्मान् । विश्वा॑सु । वि॒क्षु । अद्यु॑म् । कृ॒णो॒त॒ । शंस॑म् । नि॒नि॒त्सोः ॥

Mantra without Swara
अविष्टो अस्मान्विश्वासु विक्ष्वद्युं कृणोत शंसं निनित्सोः ॥

अविष्टो इति। अस्मान्। विश्वासु। विक्षु। अद्युम्। कृणोत। शंसम्। निनित्सोः ॥१२॥

Ashtak » 5 Adhyay » 3 Varga » 26 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे राजजनो ! तुम (विश्वासु) समस्त (विक्षु) प्रजाओं में (अस्मान्) उनके अनुकूल राज्याधिकारी हम जनों को (अविष्टो) दोषों में न प्रवेश किये हुए निरन्तर रक्षा करो हमारी (शंसम्) प्रशंसा (कृणोत) करो हम लोगों की (निनित्सोः) निन्दा करना चाहते हुए के (अद्युम्) प्रकाशरहित व्यवहार को प्रकाश करो ॥१२॥
Essence
राजजन प्रजाओं में वर्त्तमान निन्दक जनों का निवारण कर प्रशंसा करनेवालों की रक्षा कर और प्रजाजनों में पिता के समान वर्त्त कर अविद्यान्धकार को निवारण करें ॥१२॥
Subject
फिर राजजन क्या करें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥