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Rigveda Mandal 7 / Sukta 34 / Mantra 11

104 Sukta
25 Mantra
7/34/11
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- निचृत्त्रिपाद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
राजा॑ रा॒ष्ट्रानां॒ पेशो॑ न॒दीना॒मनु॑त्तमस्मै क्ष॒त्रं वि॒श्वायु॑ ॥११॥

राजा॑ । रा॒ष्ट्राना॑म् । पेशः॑ । न॒दीना॑म् । अनु॑त्तम् । अ॒स्मै॒ । क्ष॒त्रम् । वि॒श्वऽआ॑यु ॥

Mantra without Swara
राजा राष्ट्रानां पेशो नदीनामनुत्तमस्मै क्षत्रं विश्वायु ॥

राजा। राष्ट्रानाम्। पेशः। नदीनाम्। अनुत्तम्। अस्मै। क्षत्रम्। विश्वऽआयु ॥११॥

Ashtak » 5 Adhyay » 3 Varga » 26 Mantra » 1

Bhashya

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Meaning
जो (राजा) प्रकाशमान (नदीनाम्) नदियों के (पेशः) रूप के समान (राष्ट्रानाम्) राज्यों की रक्षा का विधान करता है (अस्मै) इसके लिये (अनुत्तम्) शत्रुओं से अपीड़ित (विश्वायु) जिससे समस्त आयु होती है वह (क्षत्रम्) धन वा राज्य होता है ॥११॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है । जो राजा न्यायकारी विद्वान् होता है, उसके प्रति समुद्र को नदी जैसे, वैसे प्रजा अनुकूल होकर ऐश्वर्य्य को उत्पन्न कराती हैं और इस राजा को पूरी आयु भी होती है ॥११॥
Subject
फिर वह राजा किसके तुल्य क्या करे, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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