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Rigveda Mandal 7 / Sukta 33 / Mantra 8

104 Sukta
14 Mantra
7/33/8
Devata- त एव Rishi- वसिष्ठपुत्राः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
सूर्य॑स्येव व॒क्षथो॒ ज्योति॑रेषां समु॒द्रस्ये॑व महि॒मा ग॑भी॒रः। वात॑स्येव प्रज॒वो नान्येन॒ स्तोमो॑ वसिष्ठा॒ अन्वे॑तवे वः ॥८॥

सूर्य॑स्यऽइव । व॒क्षथः॑ । ज्योतिः॑ । ए॒षा॒म् । स॒मु॒द्रस्य॑ऽइव । म॒हि॒मा । ग॒भी॒रः । वात॑स्यऽइव । प्र॒ऽज॒वः । न । अ॒न्येन॑ । स्तोमः॑ । व॒सि॒ष्ठाः॒ । अनु॑ऽएतवे । वः॒ ॥

Mantra without Swara
सूर्यस्येव वक्षथो ज्योतिरेषां समुद्रस्येव महिमा गभीरः। वातस्येव प्रजवो नान्येन स्तोमो वसिष्ठा अन्वेतवे वः ॥

सूर्यस्यऽइव। वक्षथः। ज्योतिः। एषाम्। समुद्रस्यऽइव। महिमा। गभीरः। वातस्यऽइव। प्रऽजवः। न। अन्येन। स्तोमः। वसिष्ठाः। अनुऽएतवे। वः ॥८॥

Ashtak » 5 Adhyay » 3 Varga » 23 Mantra » 3

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Meaning
हे (वसिष्ठाः) अतीव विद्या में वास करनेवालो ! जो (अन्वेतवे) विशेष जानने को, प्राप्त होने को वा गमन को आप्त अत्यन्त धर्मशील विद्वान् हैं (एषाम्) इन बिजुली आदि पदार्थों के और (वः) तुम्हारे विशेष जानने को प्राप्त होने को वा गमन के (सूर्यस्येव) सूर्य के समान (वक्षथः) रोष वा (ज्योतिः) प्रकाश (समुद्रस्येव) समुद्र के समान (महिमा) महिमा (गभीरः) गम्भीर (वातस्येव) पवन के समान (प्रजवः) उत्तम वेग और (स्तोमः) प्रशंसा है वह (अन्येन) और के समान (न) नहीं है ॥८॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । हे मनुष्यो ! जिन धार्मिक विद्वानों का सूर्य के समान विद्या और धर्म का प्रकाश, दुष्टाचार पर क्रोध, समुद्र के समान गम्भीरता, पवन के समान अच्छे कर्मों में वेग हो वे मिलने योग्य हैं, यह जानना चाहिये ॥८॥
Subject
फिर विद्वान् कैसे हों, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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