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Rigveda Mandal 7 / Sukta 33 / Mantra 13

104 Sukta
14 Mantra
7/33/13
Devata- त एव Rishi- वसिष्ठः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
स॒त्रे ह॑ जा॒तावि॑षि॒ता नमो॑भिः कु॒म्भे रेतः॑ सिषिचतुः समा॒नम्। ततो॑ ह॒ मान॒ उदि॑याय॒ मध्या॒त्ततो॑ जा॒तमृषि॑माहु॒र्वसि॑ष्ठम् ॥१३॥

स॒त्रे । ह॒ । जा॒तौ । इ॒षि॒ता । नमः॑ऽभिः । कु॒म्भे । रेतः॑ । सि॒सि॒च॒तुः॒ । स॒मा॒नम् । ततः॑ । ह॒ । मानः॑ । उत् । इ॒या॒य॒ । मद्या॑त् । ततः॑ । जा॒तम् । ऋषि॑म् । आ॒हुः॒ । वसि॑ष्ठम् ॥

Mantra without Swara
सत्रे ह जाताविषिता नमोभिः कुम्भे रेतः सिषिचतुः समानम्। ततो ह मान उदियाय मध्यात्ततो जातमृषिमाहुर्वसिष्ठम् ॥

सत्रे। ह। जातौ। इषिता। नमःऽभिः। कुम्भे। रेतः। सिसिचतुः। समानम्। ततः। ह। मानः। उत्। इयाय। मध्यात्। ततः। जातम्। ऋषिम्। आहुः। वसिष्ठम् ॥१३॥

Ashtak » 5 Adhyay » 3 Varga » 24 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
यदि (जातौ) प्रसिद्ध हुए (इषिताः) अध्यापक और उपदेशक (नमोभिः) अन्नादिकों से (सत्रे) दीर्घ (ह) ही पढ़ाने पढ़नेरूप यज्ञ में (कुम्भे) कलश में (रेतः) जल के (समानम्) समान विज्ञान को (सिषिचतुः) सीचें छोड़ें (ततः, ह) उसी से जो (मानः) माननेवाला (उत्, इयाय) उदय को प्राप्त होता है (ततः) उस (मध्यात्) मध्य से (जातम्) उत्पन्न हुए (वसिष्ठम्) उत्तम (ऋषिम्) वेदार्थवेत्ता विद्वान् को (आहुः) कहते हैं ॥१३॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है । जैसे स्त्री और पुरुषों से सन्तान उत्पन्न होता है, वैसे अध्यापक और उपदेशकों के पढ़ाने और उपदेश करने से विद्वान् होते हैं ॥१३॥
Subject
फिर कैसे विद्वान् होते हैं, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥