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Rigveda Mandal 7 / Sukta 32 / Mantra 3

104 Sukta
27 Mantra
7/32/3
Devata- इन्द्र: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- साम्नीपङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
रा॒यस्का॑मो॒ वज्र॑हस्तं सु॒दक्षि॑णं पु॒त्रो न पि॒तरं॑ हुवे ॥३॥

रा॒यःऽका॑मः । वज्र॑ऽहस्तम् । सु॒ऽदक्षि॑णम् । पु॒त्रः । न । पि॒तर॑म् । हु॒वे॒ ॥

Mantra without Swara
रायस्कामो वज्रहस्तं सुदक्षिणं पुत्रो न पितरं हुवे ॥

रायःऽकामः। वज्रऽहस्तम्। सुऽदक्षिणम्। पुत्रः। न। पितरम्। हुवे ॥३॥

Ashtak » 5 Adhyay » 3 Varga » 17 Mantra » 3

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Meaning
हे मनुष्यो ! (रायस्कामः) धनों की कामना करनेवाला मैं (पुत्रः) पुत्र (पितरम्) पिता को जैसे (न) वैसे (वज्रहस्तम्) शस्त्र और अस्त्रों के पार जाने और (सुदक्षिणम्) शुभ दक्षिणा रखनेवाला राजा को (हुवे) बुलाता हूँ, वैसे तुम भी बुलाओ ॥३॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । जो मनुष्य जैसे पुत्र पिता की उपासना करते हैं, वैसे राजा की जो सेवा करते हैं, वे समस्त ऐश्वर्य पाते हैं ॥३॥
Subject
फिर किसको कौन किसके तुल्य उपासना करने योग्य है, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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