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Rigveda Mandal 7 / Sukta 32 / Mantra 26

104 Sukta
27 Mantra
7/32/26
Devata- इन्द्र: Rishi- वसिष्ठः शक्तिर्वा Chhanda- निचृद्बृहती Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
इन्द्र॒ क्रतुं॑ न॒ आ भ॑र पि॒ता पु॒त्रेभ्यो॒ यथा॑। शिक्षा॑ णो अ॒स्मिन्पु॑रुहूत॒ याम॑नि जी॒वा ज्योति॑रशीमहि ॥२६॥

इन्द्र॑ । क्रतु॑म् । नः॒ । आ । भ॒र॒ । पि॒ता । पु॒त्रेभ्यः॑ । यथा॑ । शिक्ष॑ । नः॒ । अ॒स्मिन् । पु॒रु॒ऽहू॒त॒ । याम॑नि । जी॒वाः । ज्योतिः॑ । अ॒शी॒म॒हि॒ ॥

Mantra without Swara
इन्द्र क्रतुं न आ भर पिता पुत्रेभ्यो यथा। शिक्षा णो अस्मिन्पुरुहूत यामनि जीवा ज्योतिरशीमहि ॥

इन्द्र। क्रतुम्। नः। आ। भर। पिता। पुत्रेभ्यः। यथा। शिक्ष। नः। अस्मिन्। पुरुऽहूत। यामनि। जीवाः। ज्योतिः। अशीमहि ॥२६॥

Ashtak » 5 Adhyay » 3 Varga » 21 Mantra » 6

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1 Bhashyas
Meaning
हे (पुरुहूत) बहुतों से प्रशंसा को प्राप्त (इन्द्र) परमैश्वर्य के देनेवाले जगदीश्वर भगवन् ! (यथा) जैसे (पुत्रेभ्यः) पुत्रों के लिये (पिता) पिता, वैसे (नः) हम लोगों के लिये (क्रतुम्) धर्मयुक्त बुद्धि को (आ, भर) अच्छे प्रकार धारण कीजिये (अस्मिन्) इस (यामनि) वर्त्तमान समय में (नः) हम लोगों को (शिक्ष) सिखलाओ जिससे (जीवाः) जीव हम लोग (ज्योतिः) विज्ञान को और आपको (अशीमहि) प्राप्त होवें ॥२६॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । हे जगदीश्वर ! जैसे पिता हम लोगों को पुष्ट करता है, वैसे आप पालना कीजिये जैसे आप्त विद्वान् जन विद्यार्थियों के लिये शिक्षा देकर सत्य बुद्धि का ग्रहण कराता है, वैसे ही हमको सत्य विज्ञान ग्रहण कराओ जिससे हम लोग सृष्टिविद्या और आपको पाकर सर्वदैव आनन्दित हों ॥२६॥
Subject
परमेश्वर मनुष्यों को किसके तुल्य प्रार्थना करने योग्य है, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥