Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 7 / Sukta 32 / Mantra 15

104 Sukta
27 Mantra
7/32/15
Devata- इन्द्र: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- निचृत्पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
म॒घोनः॑ स्म वृत्र॒हत्ये॑षु चोदय॒ ये दद॑ति प्रि॒या वसु॑। तव॒ प्रणी॑ती हर्यश्व सू॒रिभि॒र्विश्वा॑ तरेम दुरि॒ता ॥१५॥

म॒घोनः॑ । स्म॒ । वृ॒त्र॒ऽहत्ये॑षु । चो॒द॒य॒ । ये । दद॑ति । प्रि॒या । वसु॑ । तव॑ । प्रऽनी॑ती । ह॒रि॒ऽअ॒श्व॒ । सू॒रिऽभिः॑ । विश्वा॑ । त॒रे॒म॒ । दुः॒ऽइ॒ता ॥

Mantra without Swara
मघोनः स्म वृत्रहत्येषु चोदय ये ददति प्रिया वसु। तव प्रणीती हर्यश्व सूरिभिर्विश्वा तरेम दुरिता ॥

मघोनः। स्म। वृत्रऽहत्येषु। चोदय। ये। ददति। प्रिया। वसु। तव। प्रऽनीती। हरिऽअश्व। सूरिऽभिः। विश्वा। तरेम। दुःऽइता ॥१५॥

Ashtak » 5 Adhyay » 3 Varga » 19 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (हर्यश्व) हरणशील महान् घोड़ोंवाले मनुष्य ! (सूरिभिः) विद्वानों के साथ (ये) जो (तव) आपकी (प्रणीती) उत्तम नीति से (प्रिया) प्रिय मनोहर (वसु) धनों को (ददति) देते हैं उनको और जो आपकी उत्तम नीति और विद्वानों के साथ हम लोग (विश्वा) सब (दुरिता) दुःखों को (तरेम) तरें उन्हें भी आप (वृत्रहत्येषु) शत्रुओं की हिंसा जिनमें होती है उनमें (मघोनः) धनाढ्य करने (स्म) ही को (चोदय) प्रेरणा देओ ॥१५॥
Essence
हे राजा ! आप यदि पक्षपात को छोड़ के सबकी रक्षा करें और उदार धनाढ्यों को संग्राम में प्रेरणा दें तो सब हम लोग सब दुःखों को तरें ॥१५॥
Subject
फिर वह राजा क्या करे, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥