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Rigveda Mandal 7 / Sukta 31 / Mantra 4

104 Sukta
12 Mantra
7/31/4
Devata- इन्द्र: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- आर्च्युष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
व॒यमि॑न्द्र त्वा॒यवो॒ऽभि प्र णो॑नुमो वृषन्। वि॒द्धि त्व१॒॑स्य नो॑ वसो ॥४॥

व॒यम् । इ॒न्द्र॒ । त्वा॒ऽयवः॑ । अ॒भि । प्र । नो॒नु॒मः॒ । वृ॒ष॒न् । वि॒द्धि । तु । अ॒स्य । नः॒ । व॒सो॒ इति॑ ॥

Mantra without Swara
वयमिन्द्र त्वायवोऽभि प्र णोनुमो वृषन्। विद्धि त्व१स्य नो वसो ॥

वयम्। इन्द्र। त्वाऽयवः। अभि। प्र। नोनुमः। वृषन्। विद्धि। तु। अस्य। नः। वसो इति ॥४॥

Ashtak » 5 Adhyay » 3 Varga » 15 Mantra » 4

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Meaning
हे (वसो) वसाने (वृषन्) बल रखने और बल के देनेवाले (इन्द्र) विद्या और ऐश्वर्ययुक्त राजा वा अध्यापक ! (त्वायवः) आपकी कामना करनेवाले (वयम्) हम लोग आपको (अभि, प्र, णोनुमः) सब ओर से अच्छे प्रकार निरन्तर प्रणाम करें आप (नः) हमको (तु) तो (अस्य) इस राज्य के रक्षा करनेवाले (विद्धि) जानो ॥४॥
Essence
जैसे धार्मिक प्रजाजन धार्मिक राजा की कामना करते और उस को नमते हैं, वैसे ही राजा इस धार्मिकी प्रजा की कामना करे और निरन्तर नमे ॥४॥
Subject
फिर राजा और प्रजाजन परस्पर कैसे वर्तें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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