Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 7 / Sukta 26 / Mantra 2

104 Sukta
5 Mantra
7/26/2
Devata- इन्द्र: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
उ॒क्थउ॑क्थे॒ सोम॒ इन्द्रं॑ ममाद नी॒थेनी॑थे म॒घवा॑नं सु॒तासः॑। यदीं॑ स॒बाधः॑ पि॒तरं॒ न पु॒त्राः स॑मा॒नद॑क्षा॒ अव॑से॒ हव॑न्ते ॥२॥

उक्थेऽउ॑क्थे । सोमः॑ । इन्द्र॑म् । म॒मा॒द॒ । नी॒थेऽनी॑थे । म॒घऽवा॑नम् । सु॒तासः॑ । यत् । ई॒म् । स॒ऽबाधः॑ । पि॒तर॑म् । न । पु॒त्राः । स॒मा॒नऽद॑क्षाः । अव॑से । हव॑न्ते ॥

Mantra without Swara
उक्थउक्थे सोम इन्द्रं ममाद नीथेनीथे मघवानं सुतासः। यदीं सबाधः पितरं न पुत्राः समानदक्षा अवसे हवन्ते ॥

उक्थेऽउक्थे। सोमः। इन्द्रम्। ममाद। नीथेऽनीथे। मघऽवानम्। सुतासः। यत्। ईम्। सऽबाधः। पितरम्। न। पुत्राः। समानऽदक्षाः। अवसे। हवन्ते ॥२॥

Ashtak » 5 Adhyay » 3 Varga » 10 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वानो ! (यत्) जो (ईम्) सब ओर से (सबाधः) पीड़ा के साथ वर्त्तमान (पितरम्) पिता को (समानदक्षाः) समान बल, विद्या और चतुरता जिनके विद्यमान वे (पुत्राः) पुत्र जन (न) जैसे (अवसे) रक्षा आदि के लिये (सुतासः) विद्या और ऐश्वर्य में प्रकट हुए (मघवानम्) धर्म कर्म बहुत धन जिसके उसको (हवन्ते) स्पर्द्धा करते वा ग्रहण करते हैं और जैसे (सोमः) बड़ी-बड़ी ओषधियों का रस वा ऐश्वर्य्य (उक्थे-उक्थे) धर्मयुक्त उपदेश करने योग्य व्यवहार तथा (नीथे-नीथे) पहुँचाने-पहुँचाने योग्य सत्य व्यवहार में (इन्द्रम्) जीवात्मा को (ममाद) हर्षित करता है, उनके साथ वैसा ही आचरण करो ॥२॥
Essence
इस मन्त्र में उपमा और वाचकलुप्तोपमालङ्कार हैं। जो विद्यार्थी जन जैसे अच्छे पुत्र क्लेशयुक्त माता पिता को प्रीति से सेवते हैं, वैसे गुरु की सेवा करते हैं वा जैसे विद्या, विनय और पुरुषार्थों से उत्पन्न हुआ ऐश्वर्य उत्पन्न करनेवाले को आनन्दित करता है, वैसे तुम लोग वर्तो ॥२॥
Subject
फिर किसके तुल्य कौन क्या करता है, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥