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Rigveda Mandal 7 / Sukta 24 / Mantra 1

104 Sukta
6 Mantra
7/24/1
Devata- इन्द्र: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
योनि॑ष्ट इन्द्र॒ सद॑ने अकारि॒ तमा नृभिः॑ पुरुहूत॒ प्र या॑हि। असो॒ यथा॑ नोऽवि॒ता वृ॒धे च॒ ददो॒ वसू॑नि म॒मद॑श्च॒ सोमैः॑ ॥१॥

योनिः॑ । ते॒ । इ॒न्द्र॒ । सद॑ने । अ॒का॒रि॒ । तम् । आ । नृऽभिः॑ । पु॒रु॒ऽहू॒त॒ । प्र । या॒हि॒ । असः॑ । यथा॑ । नः॒ । अ॒वि॒ता । वृ॒धे । च॒ । ददः॑ । वसू॑नि । म॒मदः॑ । च॒ । सोमैः॑ ॥

Mantra without Swara
योनिष्ट इन्द्र सदने अकारि तमा नृभिः पुरुहूत प्र याहि। असो यथा नोऽविता वृधे च ददो वसूनि ममदश्च सोमैः ॥

योनिः। ते। इन्द्र। सदने। अकारि। तम्। आ। नृऽभिः। पुरुऽहूत। प्र। याहि। असः। यथा। नः। अविता। वृधे। च। ददः। वसूनि। ममदः। च। सोमैः ॥१॥

Ashtak » 5 Adhyay » 3 Varga » 8 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
(पुरुहूत) बहुतों से स्तुति पाये हुए (इन्द्र) मनुष्यों के स्वामी राजा ! (ते) आपके (सदने) उत्तम स्थान में जो (योनिः) घर तुम से (अकारि) किया जाता है (तम्) उसको (नृभिः) नायक मनुष्यों के साथ (प्र, याहि) उत्तमता से जाओ (यथा) जैसे (नः) हमारी (अविता) रक्षा करनेवाला (असः) होओ और हमारी (वृधे) वृद्धि के लिये (च) भी (वसूनि) द्रव्य वा उत्तम पदार्थों को (आ, ददः) ग्रहण करो (सोमैः, च) और ऐश्वर्य वा उत्तमोत्तम ओषधियों के रसों से (ममदः) हर्ष को प्राप्त होओ, वैसे सब के सुख के लिये होओ ॥१॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । मनुष्यों को चाहिये कि निवासस्थान उत्तम जल, स्थल और पवन जहाँ हो, उस देश में घर बना कर वहाँ बसें, सब के सुखों के बढ़ाने के लिये धनादि पदार्थों से अच्छी रक्षा कर सबों को आनन्दित करें ॥१॥
Subject
अब छः ऋचावाले चौबीसवें सूक्त का आरम्भ है, उसके प्रथम मन्त्र में मनुष्यों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥