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Rigveda Mandal 7 / Sukta 23 / Mantra 4

104 Sukta
6 Mantra
7/23/4
Devata- इन्द्र: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- स्वराट्पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
आप॑श्चित्पिप्युः स्त॒र्यो॒३॒॑ न गावो॒ नक्ष॑न्नृ॒तं ज॑रि॒तार॑स्त इन्द्र। या॒हि वा॒युर्न नि॒युतो॑ नो॒ अच्छा॒ त्वं हि धी॒भिर्दय॑से॒ नि वाजा॑न् ॥४॥

आपः॑ । चि॒त् । पि॒प्युः॒ । स्त॒र्यः॑ । न । गावः॑ । नक्ष॑न् । ऋ॒तम् । ज॒रि॒तारः॑ । ते॒ । इ॒न्द्र॒ । या॒हि । वा॒युः । न । नि॒ऽयुतः॑ । नः॒ । अच्छ॑ । त्वम् । हि । धी॒ऽभिः । दय॑से । वि । वाजा॑न् ॥

Mantra without Swara
आपश्चित्पिप्युः स्तर्यो३ न गावो नक्षन्नृतं जरितारस्त इन्द्र। याहि वायुर्न नियुतो नो अच्छा त्वं हि धीभिर्दयसे नि वाजान् ॥

आपः। चित्। पिप्युः। स्तर्यः। न। गावः। नक्षन्। ऋतम्। जरितारः। ते। इन्द्र। याहि। वायुः। न। निऽयुतः। नः। अच्छ। त्वम्। हि। धीऽभिः। दयसे। वि। वाजान् ॥४॥

Ashtak » 5 Adhyay » 3 Varga » 7 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) सर्व सेनापति ! जो वीरजन (आपः) जलों के (चित्) समान सेनाजनों को चलाते हुए (स्तर्यः) ढँपी हुई (गावः) किरणों के (न) समान (पिप्युः) बढ़ावें और (ते) आप की (जरितारः) स्तुति करनेवाले जन (ऋतम्) सत्य को (नक्षन्) व्याप्त होते हैं उनके साथ (वायुः) पवन के (न) समान (त्वम्) आप (याहि) जाइये (हि) जिससे (धीभिः) उत्तम क्रियाओं से (नियुतः) निश्चित किये हुए (वाजान्) वेगवान् (नः) हम लोगों की (अच्छ) अच्छे प्रकार (वि, दयसे) विशेषता से दया करते हो, इससे हम लोग तुम्हारी आज्ञा को न उल्लङ्घन करें ॥४॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । हे सेनाध्यक्ष पति ! यदि आप सुरक्षित शूरवीर जनों की अच्छे प्रकार रक्षा कर अच्छी शिक्षा देकर और कृपा से उन्नति कर शत्रुओं के साथ युद्ध करावें तो ये सूर्य की किरणों के समान तेजस्वी होकर पवन के समान शीघ्र जा शत्रुओं को शीघ्र विनाशें ॥४॥
Subject
फिर सेनापति का ईश वीर कैसे युद्ध करनेवालों को रक्खे, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥