Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 7 / Sukta 21 / Mantra 8

104 Sukta
10 Mantra
7/21/8
Devata- इन्द्र: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
की॒रिश्चि॒द्धि त्वामव॑से जु॒हावेशा॑नमिन्द्र॒ सौभ॑गस्य॒ भूरेः॑। अवो॑ बभूथ शतमूते अ॒स्मे अ॑भिक्ष॒त्तुस्त्वाव॑तो वरू॒ता ॥८॥

की॒रिः । चि॒त् । हि । त्वाम् । अव॑से । जु॒हाव॑ । ईशा॑नम् । इ॒न्द्र॒ । सौभ॑गस्य । भूरेः॑ । अवः॑ । ब॒भू॒थ॒ । श॒त॒म्ऽऊ॒ते॒ । अ॒स्मे इति॑ । अ॒भि॒ऽक्ष॒त्तुः । त्वाऽव॑तः । व॒रू॒ता ॥

Mantra without Swara
कीरिश्चिद्धि त्वामवसे जुहावेशानमिन्द्र सौभगस्य भूरेः। अवो बभूथ शतमूते अस्मे अभिक्षत्तुस्त्वावतो वरूता ॥

कीरिः। चित्। हि। त्वाम्। अवसे। जुहाव। ईशानम्। इन्द्र। सौभगस्य। भूरेः। अवः। बभूथ। शतम्ऽऊते। अस्मे इति। अभिऽक्षत्तुः। त्वाऽवतः। वरूता ॥८॥

Ashtak » 5 Adhyay » 3 Varga » 4 Mantra » 3

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (शतमूते) सैकड़ों प्रकार की रक्षा करने वा (इन्द्र) परम ऐश्वर्य के देनेवाले ! जो (हि) ही (कीरिः) स्तुति करनेवाले (चित्) के समान (अवसे) रक्षा के लिये (ईशानम्) समर्थ (त्वाम्) आपको (जुहाव) बुलावे उसके (भूरेः) बहुत (सौभगस्य) उत्तम भाग्य के होने की (अवः) रक्षा करनेवाले आप (बभूथ) हूजिये। जो (अस्मे) हम लोगों को (त्वावतः) आपके सदृश (अभिक्षत्तुः) सब ओर से नाशकर्त्ता हिंसक के (वरूता) स्वीकार करनेवाला हो, उसके भी रक्षक हूजिये ॥८॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । हे राजन् शूरवीर ! जो पीड़ित प्रजाजन तुमको आह्वान दें, उनके वचन को आप शीघ्र सुनें और सब की रक्षा करनेवाले होकर दुष्टों की हिंसा करनेवाले हूजिये ॥८॥
Subject
फिर वह राजा क्या करे, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.