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Rigveda Mandal 7 / Sukta 2 / Mantra 6

104 Sukta
11 Mantra
7/2/6
Devata- आप्रियः Rishi- वसिष्ठः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
उ॒त योष॑णे दि॒व्ये म॒ही न॑ उ॒षासा॒नक्ता॑ सू॒दुघे॑व धे॒नुः। ब॒र्हि॒षदा॑ पुरुहू॒ते म॒घोनी॒ आ य॒ज्ञिये॑ सुवि॒ताय॑ श्रयेताम् ॥६॥

उ॒त । योष॑णे॒ इति॑ । दि॒व्ये इति॑ । म॒ही इति॑ । नः॒ । उ॒षसा॒नक्ता॑ । सु॒दुघा॑ऽइव । धे॒नुः । ब॒र्हि॒ऽसदा॑ । पु॒रु॒हू॒ते इति॑ पु॒रु॒ऽहू॒ते । म॒घोनी॒ इति॑ । आ । य॒ज्ञिये॑ । सु॒वि॒ताय॑ । श्र॒ये॒ता॒म् ॥

Mantra without Swara
उत योषणे दिव्ये मही न उषासानक्ता सूदुघेव धेनुः। बर्हिषदा पुरुहूते मघोनी आ यज्ञिये सुविताय श्रयेताम् ॥

उत। योषणे इति। दिव्ये इति। मही इति। नः। उषासानक्ता। सुदुघाऽइव। धेनुः। बर्हिऽसदा। पुरुहूते इति पुरुऽहूते। मघोनी इति। आ। यज्ञिये। सुविताय। श्रयेताम् ॥६॥

Ashtak » 5 Adhyay » 2 Varga » 2 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वानो ! जो (नः) हमारे लिये (यज्ञिये) सम्बन्धी कर्म में (मघोनी) बहुत धन मिलने के निमित्त (योषणे) उत्तम स्त्रियों के तुल्य (दिव्ये) शुद्धस्वरूप (मही) बड़ी (धेनुः) विद्यायुक्त वाणी वा गौ (सुदुघेव) सुन्दर प्रकार कामनाओं को पूर्ण करनेवाली के तुल्य (उत) और (बर्हिषदा) अन्तरिक्ष में रहनेवाली (पुरुहूते) बहुतों से व्याख्यान की गई (उषासानक्ता) दिन रात रूप वेला हम को (आ, श्रयेताम्) आश्रय करें, वे दिन रात (सुविताय) ऐश्वर्य के लिये यथावत् सेवने योग्य हैं ॥६॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। हे मनुष्यो ! जो स्त्रियाँ उत्तम विद्या और गुणों से युक्त, रात्रि दिन के तुल्य सुख देनेवाली सत्य वाणी के तुल्य प्रिय बोलनेवाली हों, उन्हीं का तुम लोग आश्रय करो ॥६॥
Subject
फिर विदुषी स्त्रियाँ कैसी हों, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥