Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 7 / Sukta 2 / Mantra 10

104 Sukta
11 Mantra
7/2/10
Devata- आप्रियः Rishi- वसिष्ठः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
वन॑स्प॒तेऽव॑ सृ॒जोप॑ दे॒वान॒ग्निर्ह॒विः श॑मि॒ता सू॑दयाति। सेदु॒ होता॑ स॒त्यत॑रो यजाति॒ यथा॑ दे॒वानां॒ जनि॑मानि॒ वेद॑ ॥१०॥

वन॑स्पते । अव॑ । सृ॒ज॒ । उप॑ । दे॒वान् । अ॒ग्निः । ह॒विः । श॒मि॒ता । सू॒द॒या॒ति॒ । सः । इत् । ऊँ॒ इति॑ । होता॑ । स॒त्यऽत॑रः । य॒जा॒ति॒ । यथा॑ । दे॒वाना॑म् । जनि॑मानि । वेद॑ ॥

Mantra without Swara
वनस्पतेऽव सृजोप देवानग्निर्हविः शमिता सूदयाति। सेदु होता सत्यतरो यजाति यथा देवानां जनिमानि वेद ॥

वनस्पते। अव। सृज। उप। देवान्। अग्निः। हविः। शमिता। सूदयाति। सः। इत्। ऊँ इति। होता। सत्यऽतरः। यजाति। यथा। देवानाम्। जनिमानि। वेद ॥१०॥

Ashtak » 5 Adhyay » 2 Varga » 2 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (वनस्पते) किरणों के पालक सूर्य के तुल्य तेजस्वि विद्वन् ! (शमिता) शान्तियुक्त आप (यथा) जैसे (अग्निः) अग्नि (हविः) हवन किये द्रव्य को (सूदयाति) छिन्न-भिन्न करे, वैसे (देवान्) दिव्यगुणों को (उप, अव, सृज) फैलाइये जैसे (होता) दाता (यजाति) यज्ञ करे, वैसे (इत्) ही (उ) तो (सत्यतरः) सत्य से दुःख के पार होनेवाले हूजिये। जो (देवानाम्) पृथिव्यादि दिव्य पदार्थों वा विद्वानों के (जनिमानि) जन्मों को (वेद) जानता है, (सः) वह पदार्थविद्या को प्राप्त होने योग्य है ॥१०॥
Essence
इस मन्त्र में उपमा और वाचकलुप्तोपमालङ्कार हैं। हे विद्वानो ! यदि आप लोग सूर्य जैसे वर्षा को, होता जैसे यज्ञ को और विद्वान् जैसे विद्या को, वैसे पढ़ाने और उपदेश से सर्वोपकार को सिद्ध करें तो आप के तुल्य कोई लोग नहीं हो, यह हम जानते हैं ॥१०॥
Subject
फिर विद्वान् लोग क्या करें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥