Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 7 / Sukta 19 / Mantra 9

104 Sukta
11 Mantra
7/19/9
Devata- इन्द्र: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
स॒द्यश्चि॒न्नु ते॑ मघवन्न॒भिष्टौ॒ नरः॑ शंसन्त्युक्थ॒शास॑ उ॒क्था। ये ते॒ हवे॑भि॒र्वि प॒णीँरदा॑शन्न॒स्मान्वृ॑णीष्व॒ युज्या॑य॒ तस्मै॑ ॥९॥

स॒द्यः । चि॒त् । नु । ते॒ । म॒घ॒ऽव॒न् । अ॒भिष्टौ॑ । नरः॑ । शं॒स॒न्ति॒ । उ॒क्थ॒ऽशसः॑ । उ॒क्था । ये । ते॒ । हवे॑भिः । वि । प॒णीन् । अदा॑शन् । अ॒स्मान् । वृ॒णी॒ष्व॒ । युज्या॑य । तस्मै॑ ॥

Mantra without Swara
सद्यश्चिन्नु ते मघवन्नभिष्टौ नरः शंसन्त्युक्थशास उक्था। ये ते हवेभिर्वि पणीँरदाशन्नस्मान्वृणीष्व युज्याय तस्मै ॥

सद्यः। चित्। नु। ते। मघऽवन्। अभिष्टौ। नरः। शंसन्ति। उक्थऽशासः। उक्था। ये। ते। हवेभिः। वि। पणीन्। अदाशन्। अस्मान्। वृणीष्व। युज्याय। तस्मै ॥९॥

Ashtak » 5 Adhyay » 2 Varga » 30 Mantra » 4

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (मघवन्) प्रशंसनीय विद्या के अध्यापक ! जो (उक्थशासः) प्रशंसा करने योग्य मन्त्रों के अर्थों की शिक्षा देनेवाले (नरः) विद्वान् जन (ते) तुम्हारी (अभिष्टौ) सब ओर से प्रिय वेला में (सद्यः) शीघ्र (चित्) ही (उक्था) प्रशंसित वचनों को (शंसन्ति) प्रबन्ध से कहते हैं और (ये) जो (हवेभिः) हवनों के साथ (ते) आपके (विपणीन्) व्यवहारों को (नु, अदाशन्) ही देते हैं उन्हें और (अस्मान्) हम लोगों को (तस्मै) उस (युज्याय) युक्त करने योग्य व्यवहार के लिये (वृणीष्व) स्वीकार कीजिये ॥९॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । हे विद्वान् अध्यापक ! तुम हम लोगों को वेदार्थ शीघ्र ग्रहण कराओ, जिससे हम लोग भी अध्यापन करावें ॥९॥
Subject
फिर पढ़ने और पढ़ानेवाले परस्पर कैसे वर्ताव वर्तें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.