Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 7 / Sukta 19 / Mantra 7

104 Sukta
11 Mantra
7/19/7
Devata- इन्द्र: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
मा ते॑ अ॒स्यां स॑हसाव॒न्परि॑ष्टाव॒घाय॑ भूम हरिवः परा॒दै। त्राय॑स्व नोऽवृ॒केभि॒र्वरू॑थै॒स्तव॑ प्रि॒यासः॑ सू॒रिषु॑ स्याम ॥७॥

मा । ते॒ । अ॒स्याम् । स॒ह॒सा॒ऽव॒न् । परि॑ष्टौ । अ॒घाय॑ । भू॒म॒ । ह॒रि॒ऽवः॒ । प॒रा॒ऽदै । त्राय॑स्व । नः॒ । अ॒वृ॒केभिः॑ । वरू॑थैः । तव॑ । प्रि॒यासः॑ । सू॒रिषु॑ । स्या॒म॒ ॥

Mantra without Swara
मा ते अस्यां सहसावन्परिष्टावघाय भूम हरिवः परादै। त्रायस्व नोऽवृकेभिर्वरूथैस्तव प्रियासः सूरिषु स्याम ॥

मा। ते। अस्याम्। सहसाऽवन्। परिष्टौ। अघाय। भूम। हरिऽवः। पराऽदै। त्रायस्व। नः। अवृकेभिः। वरूथैः। तव। प्रियासः। सूरिषु। स्याम ॥७॥

Ashtak » 5 Adhyay » 2 Varga » 30 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (हरिवः) प्रशंसित मनुष्य और (सहसावन्) बहुत बल से युक्त राजा ! (अस्याम्) इस (परिष्टौ) सब ओर से सङ्ग करने योग्य वेला में (ते) आपके (परादै) त्याग करने योग्य (अघाय) पाप के लिये हम लोग (मा, भूम) मत होवें (अवृकेभिः) और जो चोर नहीं उन (वरूथैः) श्रेष्ठों के साथ (नः) हम लोगों की (त्रायस्व) रक्षा कीजिये जिससे हम लोग (तव) तुम्हारे (सूरिषु) विद्वानों में (प्रियासः) प्रसन्न (स्याम) हों ॥७॥
Essence
हे राजा ! जैसे हम लोग तुम्हारी उन्नति के निमित्त प्रयत्न करें, वैसे आप भी प्रयत्न कीजिये, विद्या के प्रचार से सबको विद्वान् कराइये जिससे विरोध न हो ॥७॥
Subject
फिर राजा और प्रजाजन परस्पर कैसे वर्त्तें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥