Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 7 / Sukta 18 / Mantra 19

104 Sukta
25 Mantra
7/18/19
Devata- इन्द्र: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
आव॒दिन्द्रं॑ य॒मुना॒ तृत्स॑वश्च॒ प्रात्र॑ भे॒दं स॒र्वता॑ता मुषायत्। अ॒जास॑श्च॒ शिग्र॑वो॒ यक्ष॑वश्च ब॒लिं शी॒र्षाणि॑ जभ्रु॒रश्व्या॑नि ॥१९॥

आव॑त् । इन्द्र॑म् । य॒मुना॑ । तृत्स॑वः । च॒ । प्र । अत्र॑ । भे॒दम् । स॒र्वऽता॑ता । मु॒षा॒य॒त् । अ॒जासः॑ । च॒ । शिग्र॑वः । यक्ष॑वः । च॒ । ब॒लिम् । शी॒र्षाणि॑ । ज॒भ्रुः॒ । अश्व्या॑नि ॥

Mantra without Swara
आवदिन्द्रं यमुना तृत्सवश्च प्रात्र भेदं सर्वताता मुषायत्। अजासश्च शिग्रवो यक्षवश्च बलिं शीर्षाणि जभ्रुरश्व्यानि ॥

आवत्। इन्द्रम्। यमुना। तृत्सवः। च। प्र। अत्र। भेदम्। सर्वऽताता। मुषायत्। अजासः। च। शिग्रवः। यक्षवः। च। बलिम्। शीर्षाणि। जभ्रुः। अश्व्यानि ॥१९॥

Ashtak » 5 Adhyay » 2 Varga » 27 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो (अजासः) शस्त्र और अस्त्रों के छोड़ने (शिग्रवः) सांकेतिक बोली बोलने (यक्षवश्च) और सङ्ग करने वा (यमुना) नियम करने (तृत्सवश्च) और मारनेवाले जन (अत्र) इस (सर्वताता) राज्यपालनरूपी यज्ञ में (बलिम्) भोगने योग्य पदार्थ को और (अश्व्यानि) बड़ों के इन (शीर्षाणि) शिरों को (जभ्रुः) धारण करते हैं (च) और जो (भेदम्) विदीर्ण करने वा एक एक से तोड़-फोड़ करने को (प्र, मुषायत्) चुराता छिपाता है वा जो (इन्द्रम्) परमैश्वर्य्यवान् की (आवत्) रक्षा करे, वे सब श्रेष्ठ हैं ॥१९॥
Essence
जो राजा आदि जन, सब मनुष्यों को अभयरूपी दक्षिणा जिस के बीच विद्यमान है, ऐसे राज्यपालनरूपी यज्ञ में भेद बुदि को छोड़, महान् धार्मिक उत्तम जनों के एकमति आदि उत्तम कामों को स्वीकार कर शत्रुओं के जीतने को प्रवृत्त होते हैं, वे ही परमैश्वर्य को प्राप्त होते हैं ॥१९॥
Subject
जो मनुष्य परस्पर की रक्षा कर न्याय से राज्य को पालते हैं, वे ही शिर के समान उत्तम होते हैं ॥