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Rigveda Mandal 7 / Sukta 17 / Mantra 4

104 Sukta
7 Mantra
7/17/4
Devata- अग्निः Rishi- वसिष्ठः Chhanda- आर्च्युष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
स्व॒ध्व॒रा क॑रति जा॒तवे॑दा॒ यक्ष॑द्दे॒वाँ अ॒मृता॑न्पि॒प्रय॑च्च ॥४॥

सु॒ऽअ॒ध्व॒रा । क॒र॒ति॒ । जा॒तऽवे॑दाः । यक्ष॑त् । दे॒वान् । अ॒मृता॑न् । पि॒प्रय॑त् । च॒ ॥

Mantra without Swara
स्वध्वरा करति जातवेदा यक्षद्देवाँ अमृतान्पिप्रयच्च ॥

सुऽअध्वरा। करति। जातऽवेदाः। यक्षत्। देवान्। अमृतान्। पिप्रयत्। च ॥४॥

Ashtak » 5 Adhyay » 2 Varga » 23 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
जो (जातवेदाः) विद्या में प्रसिद्ध अध्यापक विद्यार्थियों को (देवान्) विद्वान् और (स्वध्वरा) अच्छे प्रकार अहिंसा स्वभाववाले (करति) करे (अमृतान्) अपने स्वरूप से मृत्युरहितों को (यक्षत्) सङ्गत करे (च) और इनको (पिप्रयत्) तृप्त करे, वह विद्यार्थियों को सेवने योग्य है ॥४॥
Essence
जिन अध्यापकों के विद्यार्थी शीघ्र विद्वन्, सुशील, धार्मिक होते हैं, वे ही अध्यापक प्रशंसनीय होते हैं ॥४॥
Subject
कौन अध्यापक श्रेष्ठ हैं, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥