Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 7 / Sukta 16 / Mantra 5

104 Sukta
12 Mantra
7/16/5
Devata- अग्निः Rishi- वसिष्ठः Chhanda- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
त्वम॑ग्ने गृ॒हप॑ति॒स्त्वं होता॑ नो अध्व॒रे। त्वं पोता॑ विश्ववार॒ प्रचे॑ता॒ यक्षि॒ वेषि॑ च॒ वार्य॑म् ॥५॥

त्वम् । अ॒ग्ने॒ । गृ॒हऽप॑तिः । त्वम् । होता॑ । नः॒ । अ॒ध्व॒रे । त्वम् । पोता॑ । वि॒श्व॒ऽवा॒र॒ । प्रऽचे॑ताः । यक्षि॑ । वेषि॑ । च॒ । वार्य॑म् ॥

Mantra without Swara
त्वमग्ने गृहपतिस्त्वं होता नो अध्वरे। त्वं पोता विश्ववार प्रचेता यक्षि वेषि च वार्यम् ॥

त्वम्। अग्ने। गृहऽपतिः। त्वम्। होता। नः। अध्वरे। त्वम्। पोता। विश्वऽवार। प्रऽचेताः। यक्षि। वेषि। च। वार्यम् ॥५॥

Ashtak » 5 Adhyay » 2 Varga » 21 Mantra » 5

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (विश्ववार) सब को स्वीकार करने योग्य (अग्ने) अग्नि के तुल्य प्रकाशमान (गृहपतिः) घर के रक्षक ! (त्वम्) आप (नः) हमारे (अध्वरे) अहिंसादि लक्षणयुक्त धर्म के आचरण में (होता) दाता (त्वम्) (पोता) पवित्रकर्त्ता (त्वम्) आप (प्रचेताः) अच्छे प्रकार जतानेवाले आप (वार्य्यम्) स्वीकार योग्य धर्मयुक्त व्यवहार को (यक्षि) सङ्गत करते (च) और (वेषि) व्याप्त होते हैं, उन आपकी हम लोग याचना करते हैं ॥५॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। पूर्व मन्त्र से यहाँ (ईमहे) पद की अनुवृत्ति आती है। जैसे अग्नि घर का पालक, सुखदाता, यज्ञ में पवित्रकर्त्ता, शरीर में चेतनता करानेवाला, सब विश्व का सङ्ग करता और व्याप्त होता है, वैसे ही मनुष्य होवें ॥५॥
Subject
फिर मनुष्य कैसा हो, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.