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Rigveda Mandal 7 / Sukta 16 / Mantra 2

104 Sukta
12 Mantra
7/16/2
Devata- अग्निः Rishi- वसिष्ठः Chhanda- भुरिग्बृहती Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
स यो॑जते अरु॒षा वि॒श्वभो॑जसा॒ स दु॑द्रव॒त्स्वा॑हुतः। सु॒ब्रह्मा॑ य॒ज्ञः सु॒शमी॒ वसू॑नां दे॒वं राधो॒ जना॑नाम् ॥२॥

सः । यो॒ज॒ते॒ । अ॒रु॒षा । वि॒श्वऽभो॑जसा । सः । दु॒द्र॒व॒त् । सुऽआ॑हुतः । सु॒ऽब्रह्मा॑ । य॒ज्ञः । सु॒ऽशमी॑ । वसू॑नाम् । दे॒वम् । राधः॑ । जना॑नाम् ॥

Mantra without Swara
स योजते अरुषा विश्वभोजसा स दुद्रवत्स्वाहुतः। सुब्रह्मा यज्ञः सुशमी वसूनां देवं राधो जनानाम् ॥

सः। योजते। अरुषा। विश्वऽभोजसा। सः। दुद्रवत्। सुऽआहुतः। सुऽब्रह्मा। यज्ञः। सुऽशमी। वसूनाम्। देवम्। राधः। जनानाम् ॥२॥

Ashtak » 5 Adhyay » 2 Varga » 21 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! यदि (सः) वह (स्वाहुतः) सुन्दर प्रकार आह्वान किया हुआ (सः) वह (सुब्रह्मा) सुन्दर अन्न वा धनों से युक्त वा अच्छे प्रकार चारों वेद का ज्ञाता (यज्ञः) सत्कार के योग्य (सुशमी) सुन्दर कर्मोंवाला (वसूनाम्) धनों का (राधः) धन (जनानाम्) मनुष्यों के बीच (देवम्) उत्तम (विश्वभोजसा) विश्व के रक्षक (अरुषा) घोड़ों के तुल्य जल-अग्नि को युक्त करता और (दुद्रवत्) शीघ्र प्राप्त होता हुआ (योजते) युक्त करता है, वह इच्छा सिद्धिवाला होता है ॥२॥
Essence
जो राजा प्रजापालन के अर्थ सदा सुस्थिर है, उसको जो दुःख निवारण के लिये बुलावें उनको शीघ्र प्राप्त होकर सुखी करता है, उत्तम आचरणोंवाला विद्वान् होता हुआ प्रतिक्षण प्रजा के हित की इच्छा करता है, वही सब को पूजनीय होता है ॥२॥
Subject
फिर वह राजा क्या करे, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥