Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 7 / Sukta 16 / Mantra 1

104 Sukta
12 Mantra
7/16/1
Devata- अग्निः Rishi- वसिष्ठः Chhanda- स्वराडनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
ए॒ना वो॑ अ॒ग्निं नम॑सो॒र्जो नपा॑त॒मा हु॑वे। प्रि॒यं चेति॑ष्ठमर॒तिं स्व॑ध्व॒रं विश्व॑स्य दू॒तम॒मृत॑म् ॥१॥

ए॒ना । वः॒ । अ॒ग्निम् । नम॑सा । ऊ॒र्जः । नपा॑तम् । आ । हु॒वे॒ । प्रि॒यम् । चेति॑ष्ठम् । अ॒र॒तिम् । सु॒ऽअ॒ध्व॒रम् । विश्व॑स्य । दू॒तम् । अ॒मृत॑म् ॥

Mantra without Swara
एना वो अग्निं नमसोर्जो नपातमा हुवे। प्रियं चेतिष्ठमरतिं स्वध्वरं विश्वस्य दूतममृतम् ॥

एना। वः। अग्निम्। नमसा। ऊर्जः। नपातम्। आ। हुवे। प्रियम्। चेतिष्ठम्। अरतिम्। सुऽअध्वरम्। विश्वस्य। दूतम्। अमृतम् ॥१॥

Ashtak » 5 Adhyay » 2 Varga » 21 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे प्रजाजनो ! जैसे मैं राजा (एना) इस (नमसा) अन्न वा सत्कारादि से (ऊर्जः) पराक्रम के (नपातम्) विनाश को प्राप्त न होनेवाले (प्रियम्) चाहने योग्य (चेतिष्ठम्) अतिशय कर सम्यक् ज्ञापक (अरतिम्) सुखप्रापक (स्वध्वरम्) सुन्दर अहिंसादि व्यवहारवाले (अमृतम्) अपने स्वरूप से नाशरहित (विश्वस्य) संसार के (दूतम्) बहुत कार्य्यों के साधक (अग्निम्) अग्नि के तुल्य तेजस्वी उपदेशक को (आहुवे) स्वीकार करता, वैसे तुम भी उसको स्वीकार करो ॥१॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे राजा सत्योपदेशकों का प्रचार करे, वैसे उपदेशक अपने कर्त्तव्य को प्रीति से यथावत् पूरा करें ॥१॥
Subject
अब राजा प्रजा के सुख के लिये क्या-क्या करे, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥