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Rigveda Mandal 7 / Sukta 15 / Mantra 9

104 Sukta
15 Mantra
7/15/9
Devata- अग्निः Rishi- वसिष्ठः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उप॑ त्वा सा॒तये॒ नरो॒ विप्रा॑सो यन्ति धी॒तिभिः॑। उपाक्ष॑रा सह॒स्रिणी॑ ॥९॥

उप॑ । त्वा॒ । सा॒तये॑ । नरः॑ । विप्रा॑सः । य॒न्ति॒ । धी॒तिऽभिः॑ । उप॑ । अक्ष॑रा । स॒ह॒स्रिणी॑ ॥

Mantra without Swara
उप त्वा सातये नरो विप्रासो यन्ति धीतिभिः। उपाक्षरा सहस्रिणी ॥

उप। त्वा। सातये। नरः। विप्रासः। यन्ति। धीतिऽभिः। उप। अक्षरा। सहस्रिणी ॥९॥

Ashtak » 5 Adhyay » 2 Varga » 19 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्यार्थिनि ! जैसे (विप्रासः) बुद्धिमान् (नरः) मनुष्य (धीतिभिः) अङ्गुलियों से (अक्षरा) अकारादि अक्षरों को (उप, यन्ति) उपाय से प्राप्त करते वे जो कन्या (सहस्रिणी) असंख्य विद्याविषयों को जाननेवाली हैं, उसको जानें, वैसे (त्वा) आप के (सातये) सम्यक् विभाग के लिये बुद्धिमान् मनुष्य (उप) समीप प्राप्त हों ॥९॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे अंगूठा और अङ्गुलियों से अक्षरों को जान कर विद्वान् होता है, वैसे ही विद्वान् लोग शोधन कर विद्या के रहस्यों को प्राप्त हों ॥९॥
Subject
फिर विद्वान् क्या करते हैं, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥