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Rigveda Mandal 7 / Sukta 15 / Mantra 6

104 Sukta
15 Mantra
7/15/6
Devata- अग्निः Rishi- वसिष्ठः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
सेमां वे॑तु॒ वष॑ट्कृतिम॒ग्निर्जु॑षत नो॒ गिरः॑। यजि॑ष्ठो हव्य॒वाह॑नः ॥६॥

सः । इ॒माम् । वे॒तु॒ । वष॑ट्ऽकृतिम् । अ॒ग्निः । जु॒ष॒त॒ । नः॒ । गिरः॑ । यजि॑ष्ठः । ह॒व्य॒ऽवाह॑नः ॥

Mantra without Swara
सेमां वेतु वषट्कृतिमग्निर्जुषत नो गिरः। यजिष्ठो हव्यवाहनः ॥

सः। इमाम्। वेतु। वषट्ऽकृतिम्। अग्निः। जुषत। नः। गिरः। यजिष्ठः। हव्यऽवाहनः ॥६॥

Ashtak » 5 Adhyay » 2 Varga » 19 Mantra » 1

Bhashya

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Meaning
हे मनुष्यो ! (सः) वह (यजिष्ठः) अत्यन्त यज्ञकर्त्ता (हव्यवाहनः) देने योग्य पदार्थों को प्राप्त होनेवाला (अग्निः) पावक अग्नि (नः) हमारी (इमाम्) इस (वषट्कृतिम्) शुद्ध क्रिया को और (गिरः) वाणियों को (वेतु) प्राप्त हो उसको तुम लोग (जुषत) सेवन करो ॥६॥
Essence
हे मनुष्यो ! जो अग्नि सम्यक् प्रयुक्त किया हुआ हमारी क्रियाओं का सेवन करता वह तुम लोगों को सेवने योग्य है ॥६॥
Subject
फिर वह अग्नि कैसा है, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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