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Rigveda Mandal 7 / Sukta 15 / Mantra 2

104 Sukta
15 Mantra
7/15/2
Devata- अग्निः Rishi- वसिष्ठः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
यः पञ्च॑ चर्ष॒णीर॒भि नि॑ष॒साद॒ दमे॑दमे। क॒विर्गृ॒हप॑ति॒र्युवा॑ ॥२॥

यः । पञ्च॑ । च॒र्ष॒णीः । अ॒भि । नि॒ऽस॒साद॑ । दमे॑ऽदमे । क॒विः । गृ॒हऽप॑तिः । युवा॑ ॥

Mantra without Swara
यः पञ्च चर्षणीरभि निषसाद दमेदमे। कविर्गृहपतिर्युवा ॥

यः। पञ्च। चर्षणीः। अभि। निऽससाद। दमेऽदमे। कविः। गृहऽपतिः। युवा ॥२॥

Ashtak » 5 Adhyay » 2 Varga » 18 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
(यः) जो (कविः) उत्तम ज्ञान को प्राप्त हुआ संन्यासी (दमेदमे) घर-घर में (पञ्च) पाँच (चर्षणीः) मनुष्यों वा प्राणों को (अभि, निषसाद) स्थिर करे उसका (युवा) पूर्ण ब्रह्मचर्य्य के साथ वर्त्तमान (गृहपतिः) घर का रक्षक युवा पुरुष निरन्तर सत्कार करे ॥२॥
Essence
संन्यासी जन सदा सब जगह भ्रमण करे और गृहस्थ इस विरक्त का सत्कार करे और इससे उपदेश सुने ॥२॥
Subject
फिर वे संन्यासी और गृहस्थ परस्पर कैसे वर्त्तें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥