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Rigveda Mandal 7 / Sukta 15 / Mantra 10

104 Sukta
15 Mantra
7/15/10
Devata- अग्निः Rishi- वसिष्ठः Chhanda- विराड्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒ग्नी रक्षां॑सि सेधति शु॒क्रशो॑चि॒रम॑र्त्यः। शुचिः॑ पाव॒क ईड्यः॑ ॥१०॥

अ॒ग्निः । रक्षां॑सि । से॒ध॒ति॒ । शु॒क्रऽशो॑चिः । अम॑र्त्यः । शुचिः॑ । पा॒व॒कः । ईड्यः॑ ॥

Mantra without Swara
अग्नी रक्षांसि सेधति शुक्रशोचिरमर्त्यः। शुचिः पावक ईड्यः ॥

अग्निः। रक्षांसि। सेधति। शुक्रऽशोचिः। अमर्त्यः। शुचिः। पावकः। ईड्यः ॥१०॥

Ashtak » 5 Adhyay » 2 Varga » 19 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
जो (शुक्रशोचिः) शुद्ध तेजस्वी (अमर्त्यः) साधारण मनुष्यपन से रहित (शुचिः) पवित्र (पावकः) शुद्ध पवित्र करनेवाला (ईड्यः) स्तुति करने वा खोजने चाहने योग्य (अग्निः) अग्नि के तुल्य राजा वा सेनाधीश (रक्षांसि) रक्षा करने योग्य कार्यों को (सेधति) सिद्ध करे, वह कीर्तिवाला होता है ॥१०॥
Essence
जैसे राजा अन्याय का निवारण कर न्याय का प्रकाश करता है, वैसे विद्युत् दरिद्रता का विनाश कर लक्ष्मी को प्रकट करता है ॥१०॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥