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Rigveda Mandal 7 / Sukta 12 / Mantra 2

104 Sukta
3 Mantra
7/12/2
Devata- अग्निः Rishi- वसिष्ठः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
स म॒ह्ना विश्वा॑ दुरि॒तानि॑ सा॒ह्वान॒ग्निः ष्ट॑वे॒ दम॒ आ जा॒तवे॑दाः। स नो॑ रक्षिषद्दुरि॒ताद॑व॒द्याद॒स्मान्गृ॑ण॒त उ॒त नो॑ म॒घोनः॑ ॥२॥

सः । म॒ह्ना । विश्वा॑ । दुः॒ऽइ॒तानि॑ । सा॒ह्वान् । अ॒ग्निः । स्त॒वे॒ । दमे॑ । आ । जा॒तऽवे॑दाः । सः । नः॒ । र॒क्षि॒ष॒त् । दुः॒ऽइ॒तात् । अ॒व॒द्या॒त् । अ॒स्मान् । गृ॒ण॒तः । उ॒त । नः॒ । म॒घोनः॑ ॥

Mantra without Swara
स मह्ना विश्वा दुरितानि साह्वानग्निः ष्टवे दम आ जातवेदाः। स नो रक्षिषद्दुरितादवद्यादस्मान्गृणत उत नो मघोनः ॥

सः। मह्ना। विश्वा। दुःऽइतानि। साह्वान्। अग्निः। स्तवे। दमे। आ। जातऽवेदाः। सः। नः। रक्षिषत्। दुःऽइतात्। अवद्यात्। अस्मान्। गृणतः। उत। नः। मघोनः ॥२॥

Ashtak » 5 Adhyay » 2 Varga » 15 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जगदीश्वर (दमे) घर में (अग्निः) अग्नि के तुल्य (जातवेदाः) उत्पन्न हुए पदार्थों में व्याप्त होकर विद्यमान (स्तवे) स्तुति में (मह्ना) महत्त्व से (साह्वान्) सहनशील (विश्वा) सब (दुरितानि) दुराचरणों को दूर करता है (सः) वह (अवद्यात्) निन्दनीय (दुरितात्) दुष्टाचार से (नः) हमारी (आ, रक्षिषत्) रक्षा करे (गृणतः) शुद्धि करते हुए हम लोगों की रक्षा करे (उत) और (मघोनः) बहुत धनवाले (नः) हमारी (सः) वह रक्षा करे ॥२॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। हे मनुष्यो ! जैसे घर में प्रज्वलित किया अग्नि अन्धकार और शीत की निवृत्ति करता है, वैसे ही उपासना किया परमेश्वर अज्ञान और अधर्म्माचरण को दूर कर धर्म और विद्या ग्रहण में प्रवृत्ति कराके सम्यक् रक्षा करता है ॥२॥
Subject
फिर प्रेम से उपासना किया ईश्वर क्या करता है, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥