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Rigveda Mandal 7 / Sukta 1 / Mantra 9

104 Sukta
25 Mantra
7/1/9
Devata- अग्निः Rishi- वसिष्ठः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
वि ये ते॑ अग्ने भेजि॒रे अनी॑कं॒ मर्ता॒ नरः॒ पित्र्या॑सः पुरु॒त्रा। उ॒तो न॑ ए॒भिः सु॒मना॑ इ॒ह स्याः॑ ॥९॥

वि । ये । ते॒ । अ॒ग्ने॒ । भे॒जि॒रे । अनी॑कम् । मर्ताः॑ । नरः॑ । पित्र्या॑सः । पु॒रु॒ऽत्रा । उ॒तो इति॑ । नः॒ । ए॒भिः । सु॒ऽमनाः॑ । इ॒ह । स्याः॒ ॥

Mantra without Swara
वि ये ते अग्ने भेजिरे अनीकं मर्ता नरः पित्र्यासः पुरुत्रा। उतो न एभिः सुमना इह स्याः ॥

वि। ये। ते। अग्ने। भेजिरे। अनीकम्। मर्ताः। नरः। पित्र्यासः। पुरुऽत्रा। उतो इति। नः। एभिः। सुऽमनाः। इह। स्याः ॥९॥

Ashtak » 5 Adhyay » 1 Varga » 24 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) विद्युत् के तुल्य प्रकाशमान ! (ये) जो विद्वान् (पित्र्यासः) पितरों के लिये हितकारी (मर्त्ताः) मनुष्य (नरः) नायक हैं (ते) वे (पुरुत्रा) बहुत राजाओं में (अनीकम्) सेना को (वि, भेजिरे) सेवन करते हैं (उतो) और (एभिः) इन प्रत्यक्ष विद्वानों के साथ आप (इह) इस राज्य में (नः) हम पर (सुमनाः) शुद्ध चित्तवाले प्रसन्न (स्याः) हूजिये ॥९॥
Essence
हे राजन् ! जो अग्निविद्या में कुशल, आपकी सेना के प्रकाशक, वीर पुरुष, धार्मिक, विद्वान् अधिकारी हों, उनके साथ आप न्याय से हमारे पालक हूजिये ॥९॥
Subject
फिर कैसे भृत्यों के साथ राजा प्रजा का पालन करे, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥