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Rigveda Mandal 7 / Sukta 1 / Mantra 24

104 Sukta
25 Mantra
7/1/24
Devata- अग्निः Rishi- वसिष्ठः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
म॒हो नो॑ अग्ने सुवि॒तस्य॑ वि॒द्वान्र॒यिं सू॒रिभ्य॒ आ व॑हा बृ॒हन्त॑म्। येन॑ व॒यं स॑हसाव॒न्मदे॒मावि॑क्षितास॒ आयु॑षा सु॒वीराः॑ ॥२४॥

म॒हः । नः॒ । अ॒ग्ने॒ । सु॒वि॒तस्य॑ । वि॒द्वान् । र॒यिम् । सू॒रिऽभ्यः॑ । आ । व॒ह॒ । बृ॒हन्त॑म् । येन॑ । व॒यम् । स॒ह॒सा॒ऽव॒न् । मदे॑म । अवि॑ऽक्षितासः । आयु॑षा । सु॒ऽवीराः॑ ॥

Mantra without Swara
महो नो अग्ने सुवितस्य विद्वान्रयिं सूरिभ्य आ वहा बृहन्तम्। येन वयं सहसावन्मदेमाविक्षितास आयुषा सुवीराः ॥

महः। नः। अग्ने। सुवितस्य। विद्वान्। रयिम्। सूरिऽभ्यः। आ। वह। बृहन्तम्। येन। वयम्। सहसाऽवन्। मदेम। अविऽक्षितासः। आयुषा। सुऽवीराः ॥२४॥

Ashtak » 5 Adhyay » 1 Varga » 27 Mantra » 4

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Meaning
हे (सहसावन्) बल से युक्त (अग्ने) दानशीलपुरुष (विद्वान्) विद्वान् ! आप (महः) महान् (सुवितस्य) प्रेरणा किये कर्म के कर्ता होते हुए (सूरिभ्यः) विद्वानों से (बृहन्तम्) बड़े (रयिम्) धन को (नः) हमारे लिये (आ, वह) अच्छे प्रकार प्राप्त कीजिये (येन) जिस से (अविक्षितासः) क्षीणतारहित (सुवीराः) सुन्दर वीरों से युक्त हुए (वयम्) हम लोग (आयुषा) जीवन के साथ (मदेम) आनन्दित रहें ॥२४॥
Essence
जो मनुष्य विद्वानों से बड़ी विद्या को ग्रहण करते हैं, वे सब काल में वृद्धि को प्राप्त होते हुए पूर्ण लक्ष्मी और दीर्घ अवस्था को पाते हैं ॥२४॥
Subject
फिर मनुष्य विद्वानों से क्या ग्रहण करें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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