Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 7 / Sukta 1 / Mantra 20

104 Sukta
25 Mantra
7/1/20
Devata- अग्निः Rishi- वसिष्ठः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
नू मे॒ ब्रह्मा॑ण्यग्न॒ उच्छ॑शाधि॒ त्वं दे॑व म॒घव॑द्भ्यः सुषूदः। रा॒तौ स्या॑मो॒भया॑स॒ आ ते॑ यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः ॥२०॥

नु । मे॒ । ब्रह्मा॑णि । अ॒ग्ने॒ । उत् । श॒शा॒धि॒ । त्वम् । दे॒व॒ । म॒घव॑त्ऽभ्यः । सु॒सू॒दः॒ । रा॒तौ । स्या॒म॒ । उ॒भया॑सः । आ । ते॒ । यू॒यम् । पा॒त॒ । स्व॒स्तिऽभिः॑ । सदा॑ । नः॒ ॥

Mantra without Swara
नू मे ब्रह्माण्यग्न उच्छशाधि त्वं देव मघवद्भ्यः सुषूदः। रातौ स्यामोभयास आ ते यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः ॥

नु। मे। ब्रह्माणि। अग्ने। उत्। शशाधि। त्वम्। देव। मघवत्ऽभ्यः। सुसूदः। रातौ। स्याम। उभयासः। आ। ते। यूयम्। पात। स्वस्तिऽभिः। सदा। नः ॥२०॥

Ashtak » 5 Adhyay » 1 Varga » 26 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (देव) विद्वन् (अग्ने) दाताजन ! (त्वम्) आप (मे) मेरे (मघवद्भ्यः) बहुत धनयुक्त धनाढ्यों से (ब्रह्माणि) बड़े-बड़े धनों की (उत्, शशाधि) शिक्षा कीजिये तथा दुःखों को (सुषूदः) नष्ट कीजिये जिससे (उभयासः) दोनों विद्वान् अविद्वान् हम लोग (रातौ) दान देने में प्रकट (स्याम) हों जैसे (ते) आपकी रक्षा हम करें, वैसे (यूयम्) तुम लोग (नः) हमारी (स्वस्तिभिः) सुखों से (सदा) सब काल में (नु) शीघ्र (आ, पात) अच्छे प्रकार रक्षा करो ॥२०॥
Essence
राजादि पुरुषों को चाहिये कि धनाढ्यों से दरिद्रों को भी अच्छी शिक्षा देके धनाढ्य करें तथा विद्वान् और अविद्वानों का मेल करा के परस्पर उन्नति करावें और परस्पर दुःख का निवारण कर सुखों से संयुक्त करें ॥२०॥
Subject
फिर विद्वान् क्या करे, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥