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Rigveda Mandal 7 / Sukta 1 / Mantra 19

104 Sukta
25 Mantra
7/1/19
Devata- अग्निः Rishi- वसिष्ठः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
मा नो॑ अग्ने॒ऽवीर॑ते॒ परा॑ दा दु॒र्वास॒सेऽम॑तये॒ मा नो॑ अ॒स्यै। मा नः॑ क्षु॒धे मा र॒क्षस॑ ऋतावो॒ मा नो॒ दमे॒ मा वन॒ आ जु॑हूर्थाः ॥१९॥

मा । नः॒ । अ॒ग्ने॒ । अ॒वीर॑ते । परा॑ । दा । दुः॒ऽवास॑से । अम॑तये । मा । नः॒ । अ॒स्यै । मा । नः॒ । क्षु॒धे । मा । र॒क्षसे॑ । ऋ॒त॒ऽवः॒ । मा । नः॒ । दमे॑ । मा । वने॑ । आ । जु॒हू॒र्थाः॒ ॥

Mantra without Swara
मा नो अग्नेऽवीरते परा दा दुर्वाससेऽमतये मा नो अस्यै। मा नः क्षुधे मा रक्षस ऋतावो मा नो दमे मा वन आ जुहूर्थाः ॥

मा। नः। अग्ने। अवीरते। परा। दा। दुःऽवाससे। अमतये। मा। नः। अस्यै। मा। नः। क्षुधे। मा। रक्षसे। ऋतऽवः। मा। नः। दमे। मा। वने। आ। जुहूर्थाः ॥१९॥

Ashtak » 5 Adhyay » 1 Varga » 26 Mantra » 4

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Meaning
हे (अग्ने) अग्नि के तुल्य तेजस्वी ! आप (अवीरते) वीरतारहित सेना में (नः) हमको (मा, परा, दाः) पराङ्मुख मत कीजिये (दुर्वाससे) बुरे वस्त्र धारण करने के लिये तथा (अमतये) मूर्खपन के लिये (नः) हमको (मा) मत नियुक्त कीजिये। (नः) हमको (अस्यै) इस प्यास के लिये (मा) मत वा (क्षुधे) भूख के लिये (मा) मत नियुक्त कीजिये। हे (ऋतावः) सत्य के प्रकाशक ! (रक्षसे) दुष्ट जन के लिये (दमे) घर में (नः) हमको (मा) मत पीड़ा दीजिये (वने) वन में हम को (मा) मत (आ, जुहूर्थाः) पीड़ा दीजिये ॥१९॥
Essence
हे विद्वानो ! तुम लोग हमारी कातरता, दरिद्रता, मूढ़ता, क्षुधा, तृषा, दुष्टों के सङ्ग और घर वा जङ्गल में पीड़ा का निवारण कर सुखी करो ॥१९॥
Subject
फिर विद्वान् लोग क्या करें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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