Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 7 / Sukta 1 / Mantra 13

104 Sukta
25 Mantra
7/1/13
Devata- अग्निः Rishi- वसिष्ठः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
पा॒हि नो॑ अग्ने र॒क्षसो॒ अजु॑ष्टात्पा॒हि धू॒र्तेरर॑रुषो अघा॒योः। त्वा यु॒जा पृ॑तना॒यूँर॒भि ष्या॑म् ॥१३॥

पा॒हि । नः॒ । अ॒ग्ने॒ । र॒क्षसः॑ । अजु॑ष्टात् । पा॒हि । धू॒र्तेः । अर॑रुषः । अ॒घ॒ऽयोः । त्वा । यु॒जा । पृ॒त॒ना॒ऽयून् । अ॒भि । स्या॒म् ॥

Mantra without Swara
पाहि नो अग्ने रक्षसो अजुष्टात्पाहि धूर्तेरररुषो अघायोः। त्वा युजा पृतनायूँरभि ष्याम् ॥

पाहि। नः। अग्ने। रक्षसः। अजुष्टात्। पाहि। धूर्तेः। अररुषः। अघऽयोः। त्वा। युजा। पृतनाऽयून्। अभि। स्याम् ॥१३॥

Ashtak » 5 Adhyay » 1 Varga » 25 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) विद्युत् अग्नि के तुल्य वर्त्तमान राजन् या उपदेशक ! आप (नः) हमको (रक्षसः) दुष्टाचारी मनुष्यों से (पाहि) बचाइये। हमारी (अजुष्टात्) धर्म का सेवन न करते हुए अधर्मी (धूर्तेः) धूर्त (अररुषः) शीघ्र मारनेवाले (अघायोः) आत्मा को पाप की इच्छा करते हुए से (पाहि) रक्षा कीजिये (युजा) युक्त हुए (त्वा) तुम्हारे साथ वर्त्तमान मैं (पृतनायून्) सेनाओं को चाहते हुओं के (अभि, ष्याम्) सम्मुख होऊँ ॥१३॥
Essence
वही राजा अध्यापक उपदेशक वा कर्म करनेहारा श्रेष्ठ होता है, जो आप धर्मात्मा होकर अन्यों को भी धार्मिक करे ॥१३॥
Subject
किस करके किससे किसकी रक्षा करनी चाहिये, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥