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Rigveda Mandal 6 / Sukta 9 / Mantra 7

75 Sukta
7 Mantra
6/9/7
Devata- वैश्वानरः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- भुरिग्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
विश्वे॑ दे॒वा अ॑नमस्यन्भिया॒नास्त्वाम॑ग्ने॒ तम॑सि तस्थि॒वांस॑म्। वै॒श्वा॒न॒रो॑ऽवतू॒तये॒ नोऽम॑र्त्योऽवतू॒तये॑ नः ॥७॥

विश्वे॑ । दे॒वाः । अ॒न॒म॒स्य॒न् । भि॒या॒नाः । त्वाम् । अ॒ग्ने॒ । तम॑सि । त॒स्थि॒ऽवांस॑म् । वै॒श्वा॒न॒रः । अ॒व॒तु॒ । ऊ॒तये॑ । नः॒ । अम॑र्त्यः । अ॒व॒तु॒ । ऊ॒तये॑ । नः॒ ॥

Mantra without Swara
विश्वे देवा अनमस्यन्भियानास्त्वामग्ने तमसि तस्थिवांसम्। वैश्वानरोऽवतूतये नोऽमर्त्योऽवतूतये नः ॥

विश्वे। देवाः। अनमस्यन्। भियानाः। त्वाम्। अग्ने। तमसि। तस्थिऽवांसम्। वैश्वानरः। अवतु। ऊतये। नः। अमर्त्यः। अवतु। ऊतये। नः ॥७॥

Ashtak » 4 Adhyay » 5 Varga » 11 Mantra » 7

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Meaning
हे (अग्ने) प्रकाशक परमात्मन् ! (तमसि) अन्धकार में (तस्थिवांसम्) स्थित (त्वाम्) परमात्मा के सदृश बिजुली से युक्त को वा प्राण के सदृश परमात्मा को जैसे पृथिवी आदि, वैसे (विश्वे) सम्पूर्ण (देवाः) विद्वान् जन (भियानाः) भय को प्राप्त हुए (अनमस्यन्) नम्र होते हैं वह (वैश्वानरः) सम्पूर्ण संसार के प्रकाशक (अमर्त्यः) मृत्यु धर्म से रहित आप (ऊतये) रक्षा आदि के लिये (नः) हम लोगों की (अवतु) रक्षा कीजिये और (ऊतये) रक्षा आदि के लिये (नः) हम लोगों की (अवतु) रक्षा कीजिये ॥७॥
Essence
हे मनुष्यो ! जैसे प्राण और बिजुली को प्राप्त होकर सम्पूर्ण पृथिवी आदिकों की स्थिति है और जैसे अग्नि से सम्पूर्ण प्राणी डरते हैं, वैसे ही सर्वत्र व्यापी और सब के अन्तर्यामी परमात्मा को मान के पाप के आचरण से विद्वान् जन डरते हैं, इस निमित्त से सब जन इससे डरें ॥७॥ इस सूक्त में दिनरात्रि, अपत्य, जीव, परमात्मादिकों की स्थिति का वर्णन करने से इस सूक्त के अर्थ की इससे पूर्व सूक्त के अर्थ के साथ सङ्गति जाननी चाहिये ॥ यह नवम सूक्त और ग्यारहवाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
Subject
मनुष्यों को किससे डर कर पापाचरण का आचरण न करना चाहिये, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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