Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 68 / Mantra 9

75 Sukta
11 Mantra
6/68/9
Devata- इन्द्रावरुणौ Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृज्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
प्र स॒म्राजे॑ बृह॒ते मन्म॒ नु प्रि॒यमर्च॑ दे॒वाय॒ वरु॑णाय स॒प्रथः॑। अ॒यं य उ॒र्वी म॑हि॒ना महि॑व्रतः॒ क्रत्वा॑ वि॒भात्य॒जरो॒ न शो॒चिषा॑ ॥९॥

प्र । स॒म्ऽराजे॑ । बृ॒ह॒ते । मन्म॑ । नु । प्रि॒यम् । अर्च॑ । दे॒वाय॑ । वरु॑णाय । स॒ऽप्रथः॑ । अ॒यम् । यः । उ॒र्वी इति॑ । म॒हि॒ना । महि॑ऽव्रतः । क्रत्वा॑ । वि॒ऽभाति॑ । अ॒जरः॑ । न । शो॒चिषा॑ ॥

Mantra without Swara
प्र सम्राजे बृहते मन्म नु प्रियमर्च देवाय वरुणाय सप्रथः। अयं य उर्वी महिना महिव्रतः क्रत्वा विभात्यजरो न शोचिषा ॥

प्र। सम्ऽराजे। बृहते। मन्म। नु। प्रियम्। अर्च। देवाय। वरुणाय। सऽप्रथः। अयम्। यः। उर्वी इति। महिना। महिऽव्रतः। क्रत्वा। विऽभाति। अजरः। न। शोचिषा ॥९॥

Ashtak » 5 Adhyay » 1 Varga » 12 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वन् ! (यः) जो (अयम्) यह (सप्रथः) सत्कीर्ति से विख्यात और (महिव्रतः) बड़े-बड़े धर्मयुक्त कर्म जिसके विद्यमान वह (क्रत्वा) प्रज्ञा वा कर्म से (महिना) और महिमा वा (शोचिषा) अपने प्रकाश से (अजरः) वृद्धावस्थारूपी रोग से रहित सूर्य जीवात्मा वा परमात्मा के (न) समान (उर्वी) सूर्यमण्डल और पृथिवी को (विभाति) प्रकाशित करता है उस (वरुणाय) सब से उत्तम (देवाय) अभय देनेवाले (बृहते) बड़े (सम्राजे) अच्छे सूर्य के समान विद्या और नम्रता से प्रकाशमान के लिये (प्रियम्) प्रीति करनेवाले (मन्म) विज्ञान को आप (नु) शीघ्र (प्र, अर्च) सत्कार देवें ॥९॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। हे विद्वान्जनो ! जो सूर्य के तुल्य, जीव के तुल्य वा परमात्मा के तुल्य शुभ गुण कर्म स्वभावों से देदीप्यमान, विद्या और विनय से युक्त, उत्तम यत्न के साथ वाणी मन और शरीर से पिता के समान प्रजाजनों की पालना करने को प्रयत्न करता है, उस चक्रवर्ती, सर्वोत्कृष्ट, विद्वान् और सत्कार करने योग्य राजा के लिये राज्य में सत्य नीति को आप लोग समझावें, जिससे यह सर्वत्र धर्मयुक्त यशवाला हो ॥९॥
Subject
फिर वह राजा कैसा है और उसके लिये क्या उपदेश देना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥