Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 68 / Mantra 10

75 Sukta
11 Mantra
6/68/10
Devata- इन्द्रावरुणौ Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृज्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
इन्द्रा॑वरुणा सुतपावि॒मं सु॒तं सोमं॑ पिबतं॒ मद्यं॑ धृतव्रता। यु॒वो रथो॑ अध्व॒रं दे॒ववी॑तये॒ प्रति॒ स्वस॑र॒मुप॑ याति पी॒तये॑ ॥१०॥

इन्द्रा॑वरुणा । सु॒त॒ऽपौ॒ । इ॒मम् । सु॒तम् । सोम॑म् । पि॒ब॒त॒म् । मद्य॑म् । धृ॒त॒ऽव्र॒ता॒ । यु॒वोः । रथः॑ । अ॒ध्व॒रम् । दे॒वऽवी॑तये । प्रति॑ । स्वस॑रम् । उप॑ । या॒ति॒ । पी॒तये॑ ॥

Mantra without Swara
इन्द्रावरुणा सुतपाविमं सुतं सोमं पिबतं मद्यं धृतव्रता। युवो रथो अध्वरं देववीतये प्रति स्वसरमुप याति पीतये ॥

इन्द्रावरुणा। सुतऽपौ। इमम्। सुतम्। सोमम्। पिबतम्। मद्यम्। धृतऽव्रता। युवोः। रथः। अध्वरम्। देवऽवीतये। प्रति। स्वसरम्। उप। याति। पीतये ॥१०॥

Ashtak » 5 Adhyay » 1 Varga » 12 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्रावरुणा) बिजुली के समान वर्त्तमान (सुतपौ) सुन्दर ब्रह्मचर्य आदि अनुष्ठान तप जिनका और (धृतव्रता) जिन्होंने उत्तम कर्म धारण किये हैं, वे सभा और सेनाधीशो ! जिन (युवोः) तुम लोगों का (रथः) विमान आदि यान (देववीतये) दिव्यगुणों की प्राप्ति और (पीतये) उत्तमोत्तम रस पीने के लिये (प्रति, स्वसरम्) प्रतिदिन (अध्वरम्) अहिंसामय यज्ञ को (उप, याति) प्राप्त होता है वे (इमम्) इस (सुतम्) उत्पन्न किये हुए (मद्यम्) जिससे जीव आनन्द को प्राप्त होता है उस (सोमम्) बड़ी-बड़ी ओषधियों के रस को (पिबतम्) पिओ ॥१०॥
Essence
हे राजप्रजाजनो ! तुम प्रतिदिन सोमलता आदि से उत्पन्न किये हुए सर्व रोगों के हरने, बल बुद्धि, पराक्रम बढ़ानेवाले, हिंसारहित, महौषधियों के रस को पीकर धर्मात्मा होओ ॥१०॥
Subject
फिर वे राज प्रजाजन क्या करके कैसे हो, इस विषय को कहते हैं ॥