Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 67 / Mantra 8

75 Sukta
11 Mantra
6/67/8
Devata- मित्रावरुणौ Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
ता जि॒ह्वया॒ सद॒मेदं सु॑मे॒धा आ यद्वां॑ स॒त्यो अ॑र॒तिर्ऋ॒ते भूत्। तद्वां॑ महि॒त्वं घृ॑तान्नावस्तु यु॒वं दा॒शुषे॒ वि च॑यिष्ट॒मंहः॑ ॥८॥

ता । जि॒ह्वया॑ । सद॑म् । आ । इ॒दम् । सु॒ऽमे॒धाः । आ । यत् । वा॒म् । स॒त्यः । अ॒र॒तिः । ऋ॒ते । भू॒त् । तत् । वा॒म् । म॒हि॒ऽत्वम् । घृ॒त॒ऽअ॒न्नौ॒ । अ॒स्तु॒ । यु॒वम् । दा॒शुषे॑ । वि । च॒यि॒ष्ट॒म् । अंहः॑ ॥

Mantra without Swara
ता जिह्वया सदमेदं सुमेधा आ यद्वां सत्यो अरतिर्ऋते भूत्। तद्वां महित्वं घृतान्नावस्तु युवं दाशुषे वि चयिष्टमंहः ॥

ता। जिह्वया। सदम्। आ। इदम्। सुऽमेधाः। आ। यत्। वाम्। सत्यः। अरतिः। ऋते। भूत्। तत्। वाम्। महिऽत्वम्। घृतऽअन्नौ। अस्तु। युवम्। दाशुषे। वि। चयिष्टम्। अंहः ॥८॥

Ashtak » 5 Adhyay » 1 Varga » 10 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (घृतान्नौ) बहुत घृत और अन्नवाले अध्यापक और उपदेशक जनो ! (वाम्) तुम दोनों के उपदेश से (सुमेधाः) उत्तम जिसकी बुद्धि वह (अरतिः) सत्य उपदेश को प्राप्त होता हुआ (सत्यः) सज्जनों में उत्तम जन (जिह्वया) वाणी से (आ, इदम्, सदम्) सब ओर से जिसमें विद्वान् जन स्थिर होते हैं, उस सत्य वचन को पाकर (ऋते) सत्य धर्म में (आ, भूत्) प्रसिद्ध होवे (यत्) जो (युवम्) आप दोनों (दाशुषे) दानशील पुरुष के लिये (अंहः) पाप को (वि, चयिष्टम्) विगत चयन करते हैं (तत्) वह (वाम्) तुम दोनों की (महित्वम्) महिमा (अस्तु) हो (ता) उन तुम दोनों का हम लोग निरन्तर सत्कार करें ॥८॥
Essence
हे मनुष्यो ! जिनकी उत्तेजना से तुम लोग विद्या को प्राप्त होओ वा उपदेश ग्रहण करो, उनका धन्यवाद आदि से निरन्तर सत्कार करो, जिनके सङ्ग से मनुष्य सत्य आचरणवाले उत्तम ज्ञाता होते हैं, वे ही महाशय हैं ॥८॥
Subject
फिर किनके सङ्ग से जन विद्वान् हों, इस विषय को कहते हैं ॥