Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 67 / Mantra 3

75 Sukta
11 Mantra
6/67/3
Devata- मित्रावरुणौ Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
आ या॑तं मित्रावरुणा सुश॒स्त्युप॑ प्रि॒या नम॑सा हू॒यमा॑ना। सं याव॑प्नः॒स्थो अ॒पसे॑व॒ जना॑ञ्छ्रुधीय॒तश्चि॑द्यतथो महि॒त्वा ॥३॥

आ । या॒त॒म् । मि॒त्रा॒व॒रु॒णा॒ । सु॒ऽश॒स्ति । उप॑ । प्रि॒या । नम॑सा । हू॒यमा॑ना । सम् । यौ । अ॒प्नः॒ऽस्थः । अ॒पसा॑ऽइव । जना॑न् । श्रु॒धि॒ऽय॒तः । चि॒त् । य॒त॒थः॒ । म॒हि॒त्वा ॥

Mantra without Swara
आ यातं मित्रावरुणा सुशस्त्युप प्रिया नमसा हूयमाना। सं यावप्नःस्थो अपसेव जनाञ्छ्रुधीयतश्चिद्यतथो महित्वा ॥

आ। यातम्। मित्रावरुणा। सुऽशस्ति। उप। प्रिया। नमसा। हूयमाना। सम्। यौ। अप्नःऽस्थः। अपसाऽइव। जनान्। श्रुधिऽयतः। चित्। यतथः। महित्वा ॥३॥

Ashtak » 5 Adhyay » 1 Varga » 9 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (प्रिया) सब को तृप्त करनेवाले (मित्रावरुणा) प्राण और उदान के समान प्रिय पुरुषो ! (नमसा) सत्कार से (हूयमाना) बुलाते हुए तुम दोनों (जनान्) मनुष्य के (उप, आ, यातम्) समीप आओ तथा (सुशस्ति) सुन्दर प्रशंसा को प्राप्त होओ (यौ) जो (चित्) निश्चय से (महित्वा) बड़प्पन से (यतथः) यत्न करते हैं वा (श्रुधीयतः) अपने अन्न की इच्छा करते हैं, वे दोनों (अप्नःस्थः) सन्तानों में ठहरनेवाला (अपसेव) कर्म से जैसे वैसे हम लोगों को (सम्) प्राप्त होवें ॥३॥
Essence
हे मनुष्यो ! तुम अध्यापक और उपदेशकों को सदा सत्कार से बुलाकर उनका सत्कार कर विद्या और सत्योपदेश को संसार के बीच विस्तारो। हे अध्यापक और उपदेशको ! तुम प्रयत्न से माता और पिता के समान मनुष्यों को उत्तम शिक्षा देकर विद्यावान् सर्वोपकार करनेवालों को सिद्ध करो ॥३॥
Subject
फिर कौन निरन्तर सत्कार करने योग्य हैं, इस विषय को कहते हैं ॥