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Rigveda Mandal 6 / Sukta 66 / Mantra 5

75 Sukta
11 Mantra
6/66/5
Devata- मरुतः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
म॒क्षू न येषु॑ दो॒हसे॑ चिद॒या आ नाम॑ धृ॒ष्णु मारु॑तं॒ दधा॑नाः। न ये स्तौ॒ना अ॒यासो॑ म॒ह्ना नू चि॑त्सु॒दानु॒रव॑ यासदु॒ग्रान् ॥५॥

म॒क्षु । न । येषु॑ । दो॒हसे॑ । चि॒त् । अ॒याः । आ । नाम॑ । घृ॒ष्णु । मारु॑तम् । दधा॑नाः । न । ये । स्तौ॒नाः । अ॒यासः॑ । म॒ह्ना । नु । चि॒त् । सु॒ऽदानुः॑ । अव॑ । या॒स॒त् । उ॒ग्रान् ॥

Mantra without Swara
मक्षू न येषु दोहसे चिदया आ नाम धृष्णु मारुतं दधानाः। न ये स्तौना अयासो मह्ना नू चित्सुदानुरव यासदुग्रान् ॥

मक्षु। न। येषु। दोहसे। चित्। अयाः। आ। नाम। घृष्णु। मारुतम्। दधानाः। न। ये। स्तौनाः। अयासः। मह्ना। नु। चित्। सुऽदानुः। अव। यासत्। उग्रान् ॥५॥

Ashtak » 5 Adhyay » 1 Varga » 7 Mantra » 5

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Meaning
(येषु) जिन मनुष्यों में (चित्) निश्चय से (दोहसे) कामों के पूरे करने की शक्ति नहीं है वा जो (अयाः) प्राप्त होते हुए (धृष्णु) दृढ़ प्रगल्भ (मारुतम्) मनुष्यों के इस (नाम) प्रसिद्ध व्यवहार को (आ, दधानाः) धारण करते हुए हैं वा (ये) जो (अयासः) चलते हुए (स्तौनाः) चोर (न) नहीं और जो (सुदानुः) उत्तम दान देनेवाला (उग्रान्) कठिन स्वभाववालों को (मक्षू) शीघ्र (न)(अव, यासत्) प्राप्त करे उनका (चित्) शीघ्र (मह्ना) महत्त्व से (नू) शीघ्र सत्कार करे, उनको यथावत् सब जानें ॥५॥
Essence
हे मनुष्यो ! इस जगत् में दो प्रकार के मनुष्य हैं-एक शक्ति और विद्या से हीन, दुष्ट कर्म करनेवाले हैं, दूसरे शक्तिमान्, श्रेष्ठ कर्म धारण करनेवाले हैं, उनमें जो दुष्कर्म करनेवालों का सत्कार नहीं करते और श्रेष्ठों का सत्कार करते हैं, वे शीघ्र महान् चाहे हुए सुख को पाते हैं ॥५॥
Subject
यहाँ कितने प्रकार के पुरुष होते हैं, इस विषय को कहते हैं ॥

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