Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 63 / Mantra 7

75 Sukta
11 Mantra
6/63/7
Devata- अश्विनौ Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
आ वां॒ वयोऽश्वा॑सो॒ वहि॑ष्ठा अ॒भि प्रयो॑ नासत्या वहन्तु। प्र वां॒ रथो॒ मनो॑जवा असर्जी॒षः पृ॒क्ष इ॒षिधो॒ अनु॑ पू॒र्वीः ॥७॥

आ । वा॒म् । वयः॑ । अश्वा॑सः । वहि॑ष्ठाः । अ॒भि । प्रयः॑ । ना॒स॒त्या॒ । व॒ह॒न्तु॒ । प्र । वा॒म् । रथः॑ । मनः॑ऽजवाः । अ॒स॒र्जि॒ । इ॒षः । पृ॒क्षः । इ॒षिधः॑ । अनु॑ । पू॒र्वीः ॥

Mantra without Swara
आ वां वयोऽश्वासो वहिष्ठा अभि प्रयो नासत्या वहन्तु। प्र वां रथो मनोजवा असर्जीषः पृक्ष इषिधो अनु पूर्वीः ॥

आ। वाम्। वयः। अश्वासः। वहिष्ठाः। अभि। प्रयः। नासत्या। वहन्तु। प्र। वाम्। रथः। मनःऽजवाः। असर्जि। इषः। पृक्षः। इषिधः। अनु। पूर्वीः ॥७॥

Ashtak » 5 Adhyay » 1 Varga » 4 Mantra » 2

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (नासत्या) सत्य आचरण करनेवालो ! जो (वाम्) तुम दोनों के (वहिष्ठाः) अतीव यानों के ले जानेवाले (मनोजवाः) मन के समान जिनकी गति वे (अश्वासः) शीघ्रगामी अग्नि आदि (वयः) पक्षियों के समान (प्रयः) अन्नादि पदार्थ को (आ, अभि, वहन्तु) सन्मुख पहुँचावें जिससे (पृक्षः) अच्छे प्रकार प्राप्त होने योग्य (इषिधः) इच्छा प्रकाश करनेवाली (पूर्वीः) प्राचीन (इषः) अन्नादि वस्तुओं में से प्रत्येक (अनु, असर्जि) रची जाती वह (रथः) रथ (वाम्) तुम दोनों को (प्र) पहुँचावे ॥७॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। हे मनुष्यो ! जो आप लोग अग्न्यादि पदार्थों के प्रयोगों को जानो तो विमानादि यानों से पक्षियों के समान अन्तरिक्ष में जा सको, जिससे चाहे हुए पदार्थों को प्राप्त होकर सर्वदा आनन्दित होओ ॥७॥
Subject
फिर मनुष्य किससे क्या करें, इस विषय को कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.