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Rigveda Mandal 6 / Sukta 62 / Mantra 4

75 Sukta
11 Mantra
6/62/4
Devata- अश्विनौ Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
ता नव्य॑सो॒ जर॑माणस्य॒ मन्मोप॑ भूषतो युयुजा॒नस॑प्ती। शुभं॒ पृक्ष॒मिष॒मूर्जं॒ वह॑न्ता॒ होता॑ यक्षत्प्र॒त्नो अ॒ध्रुग्युवा॑ना ॥४॥

ता । नव्य॑सः । जर॑माणस्य । मन्म॑ । उप॑ । भू॒ष॒तः॒ । यु॒यु॒जा॒नस॑प्ती॒ इति॑ यु॒यु॒जा॒नऽस॑प्ती । शुभ॑म् । पृक्ष॑म् । इष॑म् । ऊर्ज॑म् । वह॑न्ता । होता॑ । य॒क्ष॒त् । प्र॒त्नः । अ॒ध्रुक् । युवा॑ना ॥

Mantra without Swara
ता नव्यसो जरमाणस्य मन्मोप भूषतो युयुजानसप्ती। शुभं पृक्षमिषमूर्जं वहन्ता होता यक्षत्प्रत्नो अध्रुग्युवाना ॥

ता। नव्यसः। जरमाणस्य। मन्म। उप। भूषतः। युयुजानसप्ती इति युयुजानऽसप्ती। शुभम्। पृक्षम्। इषम्। ऊर्जम्। वहन्ता। होता। यक्षत्। प्रत्नः। अध्रुक्। युवाना ॥४॥

Ashtak » 5 Adhyay » 1 Varga » 1 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जो (युयुजानसप्ती) वेग वा आकर्षणयुक्त होनेवाले हैं, वे (युवाना) संयुक्त होनेवाले वायु बिजुली (नव्यसः) अतीव नवीन (जरमाणस्य) प्रशंसा करनेवाले के (मन्म) विज्ञान को (उप, भूषतः) पूर्ण करते हैं वा जो (शुभम्) उदक (पृक्षम्) अन्न (इषम्) इच्छा और (ऊर्जम्) पराक्रम को (वहन्ता) पहुँचानेवालों को (अध्रुक्) किसी से न द्रोह करनेवाला (प्रत्नः) जिसने पहिले विद्या पढ़ी वह (होता) ग्रहण करनेवाला पुरुष (यक्षत्) प्राप्त हो (ता) उनको तुम भी प्राप्त होओ ॥४॥
Essence
हे मनुष्यो ! जो वायु और बिजुली विज्ञान के विषय, घोड़े के समान शीघ्र जानेवाले और सब उत्तम-उत्तम पदार्थों की प्राप्ति करानेवाले हैं, उनसे चाहे हुए कार्य्यों को सिद्ध करो ॥४॥
Subject
फिर वे कैसे हैं, इस विषय को कहते हैं ॥