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Rigveda Mandal 6 / Sukta 62 / Mantra 3

75 Sukta
11 Mantra
6/62/3
Devata- अश्विनौ Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
ता ह॒ त्यद्व॒र्तिर्यदर॑ध्रमुग्रे॒त्था धिय॑ ऊहथुः॒ शश्व॒दश्वैः॑। मनो॑जवेभिरिषि॒रैः श॒यध्यै॒ परि॒ व्यथि॑र्दा॒शुषो॒ मर्त्य॑स्य ॥३॥

ता । ह॒ । त्यत् । व॒र्तिः । यत् । अर॑ध्रम् । उ॒ग्रा॒ । इ॒त्था । धियः॑ । ऊ॒ह॒थुः॒ । शश्व॑त् । अश्वैः॑ । मनः॑ऽजवेभिः । इ॒षि॒रैः । श॒यध्यै॑ । परि॑ । व्यर्थिः॑ । दा॒शुषः॑ । मर्त्य॑स्य ॥

Mantra without Swara
ता ह त्यद्वर्तिर्यदरध्रमुग्रेत्था धिय ऊहथुः शश्वदश्वैः। मनोजवेभिरिषिरैः शयध्यै परि व्यथिर्दाशुषो मर्त्यस्य ॥

ता। ह। त्यत्। वर्तिः। यत्। अरध्रम्। उग्रा। इत्था। धियः। ऊहथुः। शश्वत्। अश्वैः। मनःऽजवेभिः। इषिरैः। शयध्यै। परि। व्यथिः। दाशुषः। मर्त्यस्य ॥३॥

Ashtak » 5 Adhyay » 1 Varga » 1 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वानो ! (यत्) जो (उग्रा) तेजस्वी वायु और बिजुली (अश्वैः) महान् वेगादि गुणों से वा (इषिरैः) प्राप्त (मनोजवेभिः) मनोवद्वेगवानों से (दाशुषः) दानशील (मर्त्यस्य) मनुष्य के (त्यत्) उस (वर्तिः) मार्ग को तथा (अरध्रम्) असमृद्ध व्यवहार और (धियः) बुद्धि वा कर्मों को (शश्वत्) निरन्तर (ऊहथुः) चलाते हैं वा (शयध्यै) सोने को (व्यथिः) व्यथा को (ह) निश्चय से (परि) पहुँचाते हैं (ता) उनको (इत्था) इस प्रकार के वर्त्तमान जानकर तुम अच्छे प्रकार प्रयुक्त करो अर्थात् कलायन्त्रों में जोड़ो ॥३॥
Essence
हे मनुष्यो ! जब तुम वायु और बिजुली के गुणों को जानोगे, तभी पूर्ण ऐश्वर्य को पाओगे ॥३॥
Subject
फिर वे कैसे हैं, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥