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Rigveda Mandal 6 / Sukta 61 / Mantra 4

75 Sukta
14 Mantra
6/61/4
Devata- सरस्वती Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प्र णो॑ दे॒वी सर॑स्वती॒ वाजे॑भिर्वा॒जिनी॑वती। धी॒नाम॑वि॒त्र्य॑वतु ॥४॥

प्र । नः॒ । दे॒वी । सर॑स्वती । वाजे॑भिः । वा॒जिनी॑ऽवती । धी॒नाम् । अ॒वि॒त्री । अ॒व॒तु॒ ॥

Mantra without Swara
प्र णो देवी सरस्वती वाजेभिर्वाजिनीवती। धीनामवित्र्यवतु ॥

प्र। नः। देवी। सरस्वती। वाजेभिः। वाजिनीऽवती। धीनाम्। अवित्री। अवतु ॥४॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 30 Mantra » 4

Bhashya

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Meaning
हे सन्तानो ! जो (देवी) विदुषी (वाजेभिः) अन्नादिकों के साथ (वाजिनीवती) प्रशस्तविज्ञान वा क्रिया से युक्त वा (सरस्वती) विज्ञानयुक्त वाणी से युक्त (नः) हमारी (धीनाम्) बुद्धियों को (अवित्री) रक्षा करनेवाली (प्र, अवतु) अच्छे प्रकार करे, उसको तुम स्वीकार करो ॥४॥
Essence
माताजनों को चाहिये कि अपने सन्तानों को बाल्यावस्था में अच्छी शिक्षा देकर विद्या से विद्वान् कर उनके साथ अतुल सुख भोगें ॥४॥
Subject
फिर वह कैसी रक्षा करनेवाली है, इस विषय को कहते हैं ॥

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