Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 61 / Mantra 12

75 Sukta
14 Mantra
6/61/12
Devata- सरस्वती Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
त्रि॒ष॒धस्था॑ स॒प्तधा॑तुः॒ पञ्च॑ जा॒ता व॒र्धय॑न्ती। वाजे॑वाजे॒ हव्या॑ भूत् ॥१२॥

त्रि॒ऽस॒धस्था॑ । स॒प्तऽधा॑तुः । पञ्च॑ । जा॒ता । व॒र्धय॑न्ती । वाजे॑ऽवाजे । हव्या॑ । भू॒त् ॥

Mantra without Swara
त्रिषधस्था सप्तधातुः पञ्च जाता वर्धयन्ती। वाजेवाजे हव्या भूत् ॥

त्रिऽसधस्था। सप्तऽधातुः। पञ्च। जाता। वर्धयन्ती। वाजेऽवाजे। हव्या। भूत् ॥१२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 32 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वानो ! (त्रिषधस्था) तीन समान स्थानों में स्थित (सप्तधातुः) सात प्राण आदि जिसकी धारण करनेवाले (पञ्च) पाँच प्राणों से (जाता) प्रसिद्ध (वाजेवाजे) प्रत्येक व्यवहार वा प्रत्येक साम में (हव्या) उच्चारण करने योग्य (वर्धयन्ती) वृद्धि को प्राप्त कराती (भूत्) हो, उसका युक्ति के साथ अच्छे प्रकार प्रयोग करो ॥१२॥
Essence
जो विद्वान् जन वाणी के योग को जानते हैं तो क्या-क्या बढ़ा नहीं सकते हैं ॥१२॥
Subject
फिर वह क्या करती है, इस विषय को कहते हैं ॥