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Rigveda Mandal 6 / Sukta 61 / Mantra 10

75 Sukta
14 Mantra
6/61/10
Devata- सरस्वती Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- विराड्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ॒त नः॑ प्रि॒या प्रि॒यासु॑ स॒प्तस्व॑सा॒ सुजु॑ष्टा। सर॑स्वती॒ स्तोम्या॑ भूत् ॥१०॥

उ॒त । नः॒ । प्रि॒या । प्रि॒यासु॑ । स॒प्तऽस्व॑सा । सुऽजु॑ष्टा । सर॑स्वती । स्तोम्या॑ । भू॒त् ॥

Mantra without Swara
उत नः प्रिया प्रियासु सप्तस्वसा सुजुष्टा। सरस्वती स्तोम्या भूत् ॥

उत। नः। प्रिया। प्रियासु। सप्तऽस्वसा। सुऽजुष्टा। सरस्वती। स्तोम्या। भूत् ॥१०॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 31 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जैसे (नः) हमारी (सरस्वती) वह सरस्वती जिसको बहुत अन्तरिक्ष का सम्बन्ध है तथा (प्रियासु) सुख देनेवाली क्रिया वा स्त्रियों में (प्रिया) मनोहर (सप्तस्वसा) जिसके सात अर्थात् पाँच प्राण, मन और बुद्धि बहिन के समान वर्त्तमान तथा (सुजुष्टा) अच्छे प्रकार सेवित की हुई (उत) और (स्तोम्या) स्तुति करने योग्य (भूत्) हो, वैसे तुम्हारी भी हो ॥१०॥
Essence
जो मनुष्य सब ओर से शुद्धि करनेवाली सत्य वाणी को जानते हैं, वे ही प्रशंसा करने योग्य होते हैं ॥१०॥
Subject
फिर वह कैसी है, इस विषय को कहते हैं ॥