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Rigveda Mandal 6 / Sukta 60 / Mantra 9

75 Sukta
15 Mantra
6/60/9
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ताभि॒रा ग॑च्छतं न॒रोपे॒दं सव॑नं सु॒तम्। इन्द्रा॑ग्नी॒ सोम॑पीतये ॥९॥

ताभिः॑ । आ । ग॒च्छ॒त॒म् । न॒रा॒ । उप॑ । इ॒दम् । सव॑नम् । सु॒तम् । इन्द्रा॑ग्नी॒ इति॑ । सोम॑ऽपीतये ॥

Mantra without Swara
ताभिरा गच्छतं नरोपेदं सवनं सुतम्। इन्द्राग्नी सोमपीतये ॥

ताभिः। आ। गच्छतम्। नरा। उप। इदम्। सवनम्। सुतम्। इन्द्राग्नी इति। सोमऽपीतये ॥९॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 28 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (नरा) नायक (इन्द्राग्नी) बिजुली और वायु के समान सज्जनो ! तुम दोनों (ताभिः) उन इच्छाओं से (सोमपीतये) सोमपान के लिये (इदम्) इस (सुतम्) अच्छे प्रकार संस्कार किये हुए (सवनम्) जिससे उत्पन्न करते हैं, उसके (उप, आ, गच्छतम्) समीप प्राप्त होओ ॥९॥
Essence
यजमान जन विद्वानों को बुलाकर सदैव सत्कार करें और सत्कार पाये हुए वे लोग भी यजमानों को धर्मपथ को प्राप्त करावें ॥९॥
Subject
फिर वे क्या करें, इस विषय को कहते हैं ॥