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Rigveda Mandal 6 / Sukta 60 / Mantra 8

75 Sukta
15 Mantra
6/60/8
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
या वां॒ सन्ति॑ पुरु॒स्पृहो॑ नि॒युतो॑ दा॒शुषे॑ नरा। इन्द्रा॑ग्नी॒ ताभि॒रा ग॑तम् ॥८॥

याः । वा॒म् । सन्ति॑ । पु॒रु॒ऽस्पृहः॑ । नि॒ऽयुतः॑ । दा॒शुषे॑ । न॒रा॒ । इन्द्रा॑ग्नी॒ इति॑ । ताभिः॑ । आ । ग॒त॒म् ॥

Mantra without Swara
या वां सन्ति पुरुस्पृहो नियुतो दाशुषे नरा। इन्द्राग्नी ताभिरा गतम् ॥

याः। वाम्। सन्ति। पुरुऽस्पृहः। निऽयुतः। दाशुषे। नरा। इन्द्राग्नी इति। ताभिः। आ। गतम् ॥८॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 28 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (नरा) नायक (इन्द्राग्नी) विद्या और ऐश्वर्य्ययुक्त अध्यापक और उपदेशको ! (वाम्) तुम दोनों की (या) जो (पुरुस्पृहः) बहुतों की चाहना करते जिनसे वे (नियुतः) निश्चित (सन्ति) हैं (ताभिः) उन इच्छाओं से (दाशुषे) दान देनेवाले के लिये (आ, गतम्) आओ ॥८॥
Essence
जो मनुष्य परोपकार करने की इच्छा करते हैं, वे ही सत्पुरुष होते हैं ॥८॥
Subject
फिर वे कैसे हैं, इस विषय को कहते हैं ॥