Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 60 / Mantra 5

75 Sukta
15 Mantra
6/60/5
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ॒ग्रा वि॑घ॒निना॒ मृध॑ इन्द्रा॒ग्नी ह॑वामहे। ता नो॑ मृळात ई॒दृशे॑ ॥५॥

उ॒ग्रा । वि॒ऽघ॒निना॑ । मृधः॑ । इ॒न्द्रा॒ग्नी इति॑ । ह॒वा॒म॒हे॒ । ता । नः॒ । मृ॒ळा॒तः॒ । ई॒दृशे॑ ॥

Mantra without Swara
उग्रा विघनिना मृध इन्द्राग्नी हवामहे। ता नो मृळात ईदृशे ॥

उग्रा। विऽघनिना। मृधः। इन्द्राग्नी इति। हवामहे। ता। नः। मृळातः। ईदृशे ॥५॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 27 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! हम लोग (उग्रा) तेजस्वी (विघनिना) विशेष हननेवाले (इन्द्राग्नी) वायु और बिजुली को (हवामहे) ग्रहण करते हैं उनसे (मृधः) सङ्ग्रामों को जीतते हैं, जो (ईदृशे) ऐसे युद्धप्रकारक व्यवहार में (नः) हम लोगों को (मृळातः) सुखी करते हैं (ता) उन दोनों को तुम भी जानो ॥५॥
Essence
मनुष्यों को वायु और बिजुली यथावत् जान और उनका संप्रयोग कर सङ्ग्रामों को जीत सुख पाना चाहिये ॥५॥
Subject
फिर वायु और बिजुली कैसे हैं, इस विषय को कहते हैं ॥