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Rigveda Mandal 6 / Sukta 6 / Mantra 7

75 Sukta
7 Mantra
6/6/7
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
स चि॑त्र चि॒त्रं चि॒तय॑न्तम॒स्मे चित्र॑क्षत्र चि॒त्रत॑मं वयो॒धाम्। च॒न्द्रं र॒यिं पु॑रु॒वीरं॑ बृ॒हन्तं॒ चन्द्र॑ च॒न्द्राभि॑र्गृण॒ते यु॑वस्व ॥७॥

सः । चि॒त्र॒ । चि॒त्रम् । चि॒तय॑न्तम् । अ॒स्मे इति॑ । चित्र॑ऽक्षत्र । चि॒त्रऽत॑मम् । व॒यः॒ऽधाम् । च॒न्द्रम् । र॒यिम् । पु॒रु॒ऽवीर॑म् । बृ॒हन्त॑म् । चन्द्र॑ । च॒न्द्राभिः॑ । गृ॒ण॒ते । यु॒व॒स्व॒ ॥

Mantra without Swara
स चित्र चित्रं चितयन्तमस्मे चित्रक्षत्र चित्रतमं वयोधाम्। चन्द्रं रयिं पुरुवीरं बृहन्तं चन्द्र चन्द्राभिर्गृणते युवस्व ॥

सः। चित्र। चित्रम्। चितयन्तम्। अस्मे इति। चित्रऽक्षत्र। चित्रऽतमम्। वयःऽधाम्। चन्द्रम्। रयिम्। पुरुऽवीरम्। बृहन्तम्। चन्द्र। चन्द्राभिः। गृणते। युवस्व ॥७॥

Ashtak » 4 Adhyay » 5 Varga » 8 Mantra » 7

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1 Bhashyas
Meaning
हे (चित्र) अद्भुत गुण कर्म्म और स्वभाववाले (चित्रक्षत्र) अद्भुत राज्य वा धन से युक्त (चन्द्र) आह्लादकारक ! जैसे (सः) वह विद्वान् (चन्द्राभिः) आनन्द और धन करनेवाली प्रजाओं से (अस्मे) हम लोगों के लिये (चित्रम्) आश्चर्यभूत (चन्द्रम्) आनन्द देनेवाले सुवर्ण आदि को (चितयन्तम्) जनाते हुए तथा (चित्रतमम्) अत्यन्त आश्चर्य्ययुक्त रूप और (वयोधाम्) जीवन के धारण करने और (बृहन्तम्) बड़े (पुरुवीरम्) बहुत वीरों के देनेवाले (रयिम्) धन की (गृणते) स्तुति करता है, उसको आप (युवस्व) उत्तम प्रकार युक्त करिये ॥७॥
Essence
जो मनुष्य अद्भुत गुण, कर्म्म और स्वभावों का स्वीकार करके तथा अन्य जनों को ग्रहण कराय के धनाढ्य कराते हैं, वे अद्भुत स्तुतिवाले होते हैं ॥७॥ इस सूक्त में अग्नि तथा विद्वान् के गुणों का वर्णन करने से इस सूक्त के अर्थ की इससे पूर्व सूक्त के अर्थ के साथ सङ्गति जाननी चाहिये ॥ यह छठा सूक्त और आठवाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
Subject
फिर मनुष्यों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥