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Rigveda Mandal 6 / Sukta 56 / Mantra 4

75 Sukta
6 Mantra
6/56/4
Devata- पूषा Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
यद॒द्य त्वा॑ पुरुष्टुत॒ ब्रवा॑म दस्र मन्तुमः। तत्सु नो॒ मन्म॑ साधय ॥४॥

यत् । अ॒द्य । त्वा॒ । पु॒रु॒ऽस्तु॒त॒ । ब्रवा॑म । द॒स्र॒ । म॒न्तु॒ऽमः॒ । तत् । सु । नः॒ । मन्म॑ । सा॒ध॒य॒ ॥

Mantra without Swara
यदद्य त्वा पुरुष्टुत ब्रवाम दस्र मन्तुमः। तत्सु नो मन्म साधय ॥

यत्। अद्य। त्वा। पुरुऽस्तुत। ब्रवाम। दस्र। मन्तुऽमः। तत्। सु। नः। मन्म। साधय ॥४॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 22 Mantra » 4

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Meaning
हे (पुरुष्टुत) बहुतों से प्रशंसा को प्राप्त (दस्र) दुःख को नष्ट करनेवाले ! (मन्तुमः) प्रशस्तविज्ञानयुक्त (अद्य) आज हम (यत्) जिस ज्ञान को (त्वा) तुझ को (ब्रवाम) कहें वह तू (नः) हमारे लिये (तत्) उस (मन्म) विज्ञान को (सु, साधय) अच्छे प्रकार सिद्ध कर ॥४॥
Essence
मनुष्यों को सर्वदा सम्मुख वा अन्यत्र सत्य ही कहना चाहिये, जिससे सत्य ज्ञान सर्वत्र बढ़े ॥४॥
Subject
फिर विद्वान् क्या करे, इस विषय को कहते हैं ॥